काठमांडू, 9 सितंबर 2025 (LNV इंडिया न्यूज़): नेपाल की राजधानी काठमांडू में भड़के हिंसक प्रदर्शनों ने केपी शर्मा ओली की सरकार को तहस-नहस कर दिया है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के फैसले ने जनता के गुस्से को भड़काया, जिसके परिणामस्वरूप हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर ऐतिहासिक ‘Gen-Z क्रांति’ को अंजाम दिया। इस उथल-पुथल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और उन्हें अपमानजनक परिस्थितियों में भागना पड़ा।
संसद भवन और सरकारी इमारतों में आगजनी
प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर धावा बोलकर परिसर के कई हिस्सों को आग के हवाले कर दिया। संसद भवन से उठता भारी धुआं और आग की लपटें पूरे विश्व में चर्चा का विषय बन गई हैं। खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने 14 सरकारी इमारतों और 9 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया, जबकि 6 निजी वाहनों को भी आग लगा दी गई। काठमांडू, पोखरा, बीराटनगर, और बुटवल जैसे शहरों में हिंसक प्रदर्शन देखे गए।
वित्त मंत्री पर हमला, मंत्रियों का सामूहिक इस्तीफा
हिंसा के बीच वित्त मंत्री को प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर दौड़ाकर पीटा, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। डर और दबाव के चलते गृह मंत्री रमेश लेखक, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, और नेपाली कांग्रेस कोटे से शामिल रामनाथ अधिकारी सहित कई मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, डिप्टी पीएम समेत कम से कम 10 मंत्रियों ने इस्तीफा सौंपा है, जिससे ओली सरकार पूरी तरह से बिखर गई है।
सोशल मीडिया बैन बना क्रांति की चिंगारी
4 सितंबर को ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का तर्क था कि ये कंपनियां नेपाल में रजिस्ट्रेशन और नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। हालांकि, युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए ‘Gen-Z रिवोल्यूशन’ शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया।
हालांकि, देर रात 8 सितंबर को सरकार ने सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने की घोषणा की, लेकिन तब तक जनता का गुस्सा बेकाबू हो चुका था। प्रदर्शनकारियों ने ओली के इस्तीफे और भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हिंसा में 22 की मौत, सैकड़ों घायल
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 18 काठमांडू और 2 इटाहारी में मारे गए। करीब 300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें 25 की हालत गंभीर है। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन, रबर बुलेट्स, और लाइव फायरिंग का सहारा लिया, जिसकी नेपाल मानवाधिकार आयोग ने कड़ी निंदा की है।
काठमांडू में कर्फ्यू, सेना तैनात
हालात को नियंत्रित करने के लिए काठमांडू, ललितपुर, पोखरा, और अन्य शहरों में कर्फ्यू लागू किया गया। संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, और प्रधानमंत्री आवास के आसपास सशस्त्र पुलिस और सेना की भारी तैनाती की गई है। प्रदर्शनकारियों ने ओली के निजी आवास और उनकी पार्टी CPN-UML के दफ्तर पर भी हमला किया। खबरों के अनुसार, भक्तपुर के बालकोट में ओली के आवास को आग के हवाले कर दिया गया।
ओली का बयान और जांच के आदेश
प्रधानमंत्री ओली ने हिंसा पर दुख जताते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक बनाया। उन्होंने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने और घटनाओं की जांच के लिए 15 दिन में रिपोर्ट देने वाली समिति गठित करने की घोषणा की। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय चिंता और भारत की नजर
नेपाल के इस राजनीतिक संकट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। भारत-नेपाल सीमा पर SSB ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। काठमांडू के मेयर बालेन शाह और कई विपक्षी नेताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं संभली तो यह राजतंत्र समर्थकों और विपक्षी दलों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।
आगे क्या?
नेपाल में आज (9 सितंबर) शाम को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें ओली के इस्तीफे और नए नेतृत्व पर चर्चा हो सकती है। प्रदर्शनकारी अभी भी सड़कों पर डटे हैं और उनकी मांग है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और डिजिटल स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए। नेपाल इस समय अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है, और यह ‘Gen-Z क्रांति’ इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनने की ओर अग्रसर है।

