बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर और विद्रोही स्टार शम्मी कपूर, दोनों ही भारतीय सिनेमा के दिग्गजों में से थे। जहाँ राज कपूर अपनी भव्य फ़िल्मों और संवेदनशीलता के लिए जाने जाते थे, वहीं शम्मी कपूर अपनी ऊर्जावान अदाकारी और डांस के लिए मशहूर थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार शम्मी कपूर ने अपने बड़े भाई राज कपूर के साथ एक ऐसा ‘धोखा’ किया था, जिसकी बदौलत हमें ‘जंगली’ और ‘संगम’ जैसी ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों के कुछ सबसे यादगार गाने मिले?
ये बात उन दिनों की है जब शम्मी कपूर अपनी फ़िल्म ‘जंगली’ (1961) के लिए तैयारी कर रहे थे। इस फ़िल्म का गाना “एहसान तेरा होगा मुझ पर” आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। इस गाने को गाने के लिए शम्मी कपूर ने एक तरकीब सोची। उन्होंने अपने भाई राज कपूर को यह कहकर बुलाया कि उन्हें एक नए गाने पर उनकी राय चाहिए। राज कपूर, जो संगीत के गहरे जानकार थे, तुरंत तैयार हो गए।
शम्मी कपूर ने राज कपूर को गाना सुनाया और कहा कि यह एक ऐसा गाना है जिसे उन्होंने किसी और संगीतकार से बनवाया है, लेकिन उन्हें इसमें कुछ कमी लग रही है। राज कपूर ने गाना सुना और अपनी प्रतिक्रिया दी, कुछ सुधार भी सुझाए। असल में, यह गाना उनकी ही फ़िल्म ‘संगम’ (1964) के लिए आरक्षित था! शम्मी कपूर जानते थे कि अगर वह सीधे राज कपूर से गाने की मांग करेंगे तो वे मना कर देंगे। इसलिए उन्होंने यह अनोखी चाल चली।
इस “धोखे” का नतीजा यह हुआ कि राज कपूर ने अनजाने में ही शम्मी कपूर को “एहसान तेरा होगा मुझ पर” गाने के लिए हरी झंडी दे दी। बाद में जब राज कपूर को इस बात का पता चला तो वे पहले तो हैरान हुए, लेकिन फिर अपने छोटे भाई की इस शरारत पर मुस्कुरा दिए।
यह किस्सा सिर्फ “एहसान तेरा होगा मुझ पर” तक ही सीमित नहीं रहा। ऐसा ही कुछ “ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर” गाने के साथ भी हुआ। यह गाना भी ‘संगम’ के लिए था, लेकिन शम्मी कपूर की चालाकी से वह भी ‘जंगली’ में शामिल हो गया और सुपरहिट साबित हुआ।
यह घटना दोनों भाइयों के बीच के गहरे रिश्ते और बॉलीवुड में उनके योगदान की एक प्यारी याद दिलाती है। शम्मी कपूर की यह शरारत न सिर्फ यादगार बन गई, बल्कि इसने हिंदी सिनेमा को दो ऐसे गाने दिए जो आज भी सदाबहार हैं और लाखों दिलों पर राज करते हैं।

