रूस के निवासी मरीन (36) और कॉन्स्टेंटिन (48) ने मंत्रोच्चार, वैदिक मंगलाचरण और भगवान को साक्षी मानकर सात फेरे लिए. विवाह की सभी पारंपरिक रस्में जयमाला, सिंदूरदान, फेरे और आशीर्वाद विधिवत रूप से संपन्न कराई गईं. इस दौरान मंदिर परिसर में महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि काशीवासियों ने कन्यादान कर इस पावन अवसर को और भी विशेष बना दिया.
बातचीत के दौरान दुल्हन मरीन ने बताया कि उन्हें भारतीय सभ्यता, संस्कृति और यहां की विविधता अत्यंत प्रिय है. इसलिये काशी में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह करने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि 5 साल पहले भगवान शिव और माता पार्वती से प्रेरित होकर काशी में हिंदू रीति रिवाज से शादी करने की संकल्प लिया था, जिसे आज पूरा किया जा रहा है.
रूसी दंपती एक बिजनेसमैन हैं. दुल्हा कॉन्स्टेंटिन ने बताया कि दोनों की मुलाकात करीब 11 वर्ष पूर्व हुई थी. आपसी सहमति से दोनों ने विवाह भी कर लिया था. हम लोगों ने दशाश्वमेध घाट स्थित नरवा वीर बाबा मंदिर में शादी कर रहे हैं.
रूसी दूल्हा-दुल्हन भारतीय परिधानों में पूरी तरह पारंपरिक अंदाज में नजर आए. दुल्हन मरीन हल्का पिला साड़ी में सजी थीं, जबकि दूल्हा कॉन्स्टेंटिन धोती-कुर्ता में दिखाई दिए. दोनों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे वर्षों से भारतीय संस्कृति से जुड़े हों.
शिवाकांत पांडेय पंडित ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया गया. विवाह के उपरांत मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा. इस ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहे. कई लोगों ने इस अनूठे विवाह को अपने कैमरों में कैद किया और विदेशी जोड़े को आशीर्वाद दिया.

