लखनऊ, 26 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति राजधानी लखनऊ में ही हवा-हवाई साबित हो रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की नाक के नीचे खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, लेकिन कोई जांच तक नहीं कराई जा रही। अभियंता अंगद सिंह जैसे अधिकारी न सिर्फ अवैध निर्माणों को संरक्षण दे रहे हैं, बल्कि सील किए गए भूखंडों पर दोबारा काम शुरू करवा कर प्राधिकरण की साख को तार-तार कर रहे हैं। क्या शासन-प्रशासन इस भ्रष्टाचार की अनदेखी कर रहा है, या इसमें ऊपरी स्तर के लोग भी शामिल हैं?
अमीनाबाद के श्रीराम चौराहे पर अमित अग्रवाल के अवैध कॉम्प्लेक्स से जुड़ा है। दो दिन पहले LDA की टीम ने उच्च अधिकारियों के दबाव में इस भूखंड को सील किया था। सीलिंग के दौरान भूखंड पर लाल पेंट से लिखा गया था कि “यह भूखंड आज दिनांक को सील किया गया है”, साथ ही सीलिंग पट्टिका भी लगाई गई थी। लेकिन महज दो दिनों बाद ही निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया। सीलिंग पट्टिका को नोचकर फेंक दिया गया और लाल पेंट को मिटा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, यह सब अभियंता अंगद सिंह की शह पर हुआ, जो पहले से ही सीलिंग आदेश को दबाकर बैठे थे। खबर प्रसारित होने के बाद ही उन्होंने कार्रवाई की थी, लेकिन अब दोबारा निर्माण शुरू होने से साफ है कि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं।
LDA सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अंगद सिंह जैसे अभियंता अवैध निर्माणों से मोटी कमाई कर रहे हैं। वे न सिर्फ नियमों की अनदेखी करते हैं, बल्कि सीलिंग जैसी कार्रवाइयों को भी महज दिखावा बनाकर रख देते हैं। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई जांच नहीं कराई जा रही, जो सीएम योगी की नीति पर सवाल खड़े करता है। क्या LDA के वीसी (उपाध्यक्ष) खुद इस रैकेट में शामिल हैं, या उनकी लापरवाही से भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है?
यह घटना लखनऊ में बढ़ते अवैध निर्माणों का एक उदाहरण मात्र है। शहर में सैकड़ों ऐसे कॉम्प्लेक्स हैं जो नियमों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे हैं, और अधिकारियों की मिलीभगत से जारी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इससे न सिर्फ शहर की योजना बिगड़ रही है, बल्कि सुरक्षा और पर्यावरण को भी खतरा है। एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अधिकारी पैसे लेकर आंखें मूंद लेते हैं। सीलिंग होती है, लेकिन अगले दिन सब वैसा का वैसा।”
शासन-प्रशासन से सवाल: क्या सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति सिर्फ कागजों तक सीमित है? LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और अभियंता अंगद सिंह पर कब होगी सख्त कार्रवाई? यदि इस भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी, तो लखनऊ का विकास कैसे होगा? जनता मांग कर रही है कि मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और दोषियों को सजा दिलाएं। प्राधिकरण को आईना दिखाने का समय आ गया है – क्या सुनवाई होगी?

