लखनऊ, 24 सितंबर 2025 (विशेष संवाददाता): लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के जोन-6 में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा उदाहरण अमीनाबाद इलाके में देखने को मिल रहा है। यहां अवर अभियंता (जूनियर इंजीनियर) अंगद सिंह के संरक्षण में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी हैं। सूत्रों के मुताबिक, अंगद सिंह न सिर्फ इन निर्माणों को संरक्षण दे रहे हैं, बल्कि मोटी रकम लेकर बड़े-बड़े निर्माणों को हरी झंडी भी दिखा रहे हैं। जबकि छोटे मकानों पर वे सख्ती से सीलिंग की कार्रवाई करते नजर आते हैं। एलडीए के जोनल अधिकारी और उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की नाक के नीचे यह सब हो रहा है, लेकिन अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर अमीनाबाद जैसे व्यस्त बाजार में इन अवैध निर्माणों पर लगाम क्यों नहीं लग रही?
अमीनाबाद क्षेत्र, जो लखनऊ का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, इन दिनों अवैध निर्माणों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। झंडेवाला पार्क के ठीक सामने, कुंज बिहारी ज्वैलर्स और राज रतन ज्वैलर्स के बगल में एक बड़ा निर्माण कार्य चल रहा है, जो पूरी तरह से नियम-विरुद्ध है। सूत्र बताते हैं कि इस निर्माण को एलडीए के नियमों की अनदेखी कर अंगद सिंह का पूरा संरक्षण प्राप्त है। इसी तरह, अमीनाबाद चौराहे के पास वीआईपी वर्ल्ड के बगल में भी एक और अवैध निर्माण जोरों पर है। इन निर्माणों में न तो भवन मानचित्र की मंजूरी है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। फिर भी, ये दिन-रात चल रहे हैं, जिससे
एलडीए के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अंगद सिंह इन अवैध निर्माणों से मोटी कमाई कर रहे हैं। “मोटी रकम लेकर अंगद नियम-विरुद्ध निर्माण करवा रहे हैं,” एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। यह भ्रष्टाचार एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की जानकारी में हो रहा है, लेकिन वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। क्या वजह है कि प्रथमेश कुमार अंगद सिंह पर इतने मेहरबान हैं? क्या यहां कोई ऊपरी सांठगांठ है? ये सवाल अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं। एलडीए में अंगद सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है, लेकिन इन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
अमीनाबाद जैसे घनी आबादी वाले इलाके में अवैध निर्माण न सिर्फ शहर की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का खतरा भी पैदा कर सकते हैं। छोटे मकानों और गरीबों के निर्माणों पर अंगद सिंह सख्ती दिखाते हैं और उन्हें सील कर देते हैं, लेकिन बड़े व्यापारियों और प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को वे खुला संरक्षण देते हैं। यह दोहरा मापदंड एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हर बार उनकी आवाज दबा दी जाती है। “हमारे इलाके में अवैध निर्माणों से ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या बढ़ गई है, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं,”
जोनल अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार से वाकिफ हैं, फिर भी चुप्पी साधे हुए हैं। क्या यह एलडीए में व्याप्त भ्रष्टाचार की बड़ी साजिश का हिस्सा है? या फिर ऊपरी दबाव के कारण कार्रवाई रुकी हुई है? शहरवासियों की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यदि जल्द ही इन अवैध निर्माणों पर रोक नहीं लगी, तो अमीनाबाद का व्यस्त बाजार और बड़ा संकट झेल सकता है।
एलडीए जैसे संस्थानों में यदि भ्रष्टाचार इसी तरह जारी रहा, तो लखनऊ का विकास सपना अधर में लटक सकता है। हमारी टीम इस मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की अपडेट्स जल्द ही आपके सामने लाएगी।

