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6 Mar 2026, Fri

बेहद शुभ योग में आज Dev Uthani Ekadashi व्रत, विष्णु कृपा प्राप्त के लिए भूलकर भी ना करें ये काम

LNV INDIA – कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव उठनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं. इस बार यह शुभ तिथि 1 नवंबर यानी आज है. यह वह पवित्र तिथि है जब चार महीने के शयन (चातुर्मास) के बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं. इस दिन से ही सभी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण आदि शुरू हो जाते हैं. देव उठनी एकादशी व्रत पर ध्रुव योग, वृद्धि योग, रवि योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं इसलिए इस दिन कुछ कार्य ऐसे हैं, जिनको भूलकर भी नहीं करने चाहिए अन्यथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी नाराज हो जाते हैं. आइए जानते हैं शुभ योग में देव उठनी एकादशी व्रत के दिन क्या करें और क्या ना करें…
देव उठनी एकादशी का महत्व
पौराणिक मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर  में योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते है, इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है. इन चार महीनों में देवता विश्राम करते हैं और विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित रहते हैं. देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ ही ब्रह्मांड में पुनः शुभता का आरंभ होता है. माना जाता है कि इस दिन व्रत रखकर और पूजा कर व्यक्ति को चारों पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

देवउठनी एकादशी 2025 पर क्या करें

  • देवउठनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और ध्यान करें.
  • भगवान विष्णु, शालीग्राम और तुलसी की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करें.
  • देवउठनी एकादशी पर पूजा पाठ व दान-पुण्य करें, विशेष रूप से गरीबों को भोजन और वस्त्र दान दें.
  • तुलसी विवाह का आयोजन करें (कई जगहों पर यह परंपरा भी इसी दिन होती है).
  • देवउठनी एकादशी का उपवास रखें या फलाहार करें.
  • देवउठनी एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों भोज और दान दें.

देवउठनी एकादशी 2025 पर क्या ना करें

  • देवउठनी एकादशी के दिन मांसाहार, प्याज, लहसुन या नशे का सेवन ना करें.
  • देवउठनी एकादशी के दिन झूठ बोलना, विवाद करना या किसी का अपमान करना वर्जित है.
  • देवउठनी एकादशी के दिन भूमि खुदाई या पेड़-पौधों की कटाई जैसे कार्य ना करें, यह दिन आध्यात्मिक कार्यों के लिए समर्पित है.
  • एकादशी के दिन विवाह या गृहप्रवेश जैसे कार्य करना सही नहीं माना जाता है, इनको अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में करना शुभ माना जाता है.

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