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6 Mar 2026, Fri

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ के दौरान मस्जिद के सामने लगाए गए नारे “तेल लगा दो डाबर का, नाम मिटा दो बाबर का” ने पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर दिया है। हरियाणा के फरीदाबाद में 8 नवंबर को हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें शास्त्री और उनके समर्थक इस नारे का जाप करते दिख रहे हैं। पुलिस की मौजूदगी में हुई इस घटना पर विपक्षी दलों और इतिहासकारों ने कड़ी निंदा की है, जबकि शास्त्री ने इसे ‘हिंदू एकता का प्रतीक’ बताया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करती हैं, क्योंकि बाबर और औरंगजेब जैसे मुगल शासकों ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

विवाद का केंद्र : पदयात्रा के दौरान मस्जिद के ठीक सामने शास्त्री ने समर्थकों को उकसाते हुए नारा लगवाया। वीडियो में साफ सुनाई दे रहा है: “तेल लगा दो डाबर का, नाम मिटा दो बाबर का।” यह नारा मुगल संस्थापक बाबर के नाम को मिटाने का आह्वान करता है, जिसे सोशल मीडिया पर #BabarKaNaamMitao ट्रेंड कराया जा रहा है।

शास्त्री का बचाव : बागेश्वर धाम से जारी बयान में शास्त्री ने कहा, “यह हिंदू एकता की पुकार है। बाबर और उसके वंशजों ने सनातन पर अत्याचार किए। हम नाम मिटाने का संकल्प ले रहे हैं, ताकि इतिहास साफ हो।” लेकिन उन्होंने लाल किले धमाके का जिक्र करते हुए कहा, “चरमपंथी विचारधारा से लड़ने के लिए हिंदू एकजुट हों।”

इतिहासकारों का खंडन: बाबर और औरंगजेब के सकारात्मक योगदान
इतिहासकारों ने शास्त्री की टिप्पणी को ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी बताया। बाबर (1483-1530), मुगल साम्राज्य के संस्थापक, ने भारत में कई क्रांतिकारी बदलाव लाए:
सैन्य और प्रशासनिक योगदान*: 1526 के पानीपत युद्ध में तोपों का कुशल उपयोग कर उन्होंने केंद्रीकृत शासन की नींव रखी, जो 300 वर्षों तक चली।

उन्होंने हिंदू-मुस्लिम समानता पर जोर दिया और चीन-भूमध्यसागरीय व्यापार को बढ़ावा दिया।
सांस्कृतिक विरासत: बाबरनामा उनकी आत्मकथा है, जो फारसी साहित्य का अनमोल रत्न है। उन्होंने चारबाग उद्यान शैली और जल प्रणालियों की शुरुआत की, जो आज भी आगरा के बागों में दिखती है।

औरंगजेब (1618-1707), छठे मुगल सम्राट, के शासन में साम्राज्य अपने चरम पर पहुंचा:
आर्थिक और क्षेत्रीय विस्तार : उनके काल में मुगल अर्थव्यवस्था विश्व GDP का 25% थी, जो किंग चाइना से अधिक थी।
उन्होंने दक्कन तक विस्तार किया, जिससे भारत पहली बार एकीकृत हुआ।

सामाजिक सुधार : सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया और फतवा-ए-आलमगीरी जैसे कानूनी संहिता को लागू किया, जो न्यायपूर्ण शासन का आधार बनी।

ब्राह्मणों का काला इतिहास: ‘स्तन कर’ की सच्चाई
शास्त्री के हिंदू एकता के दावों पर सवाल उठाते हुए इतिहासकारों ने त्रावणकोर राज्य (19वीं सदी) का जिक्र किया, जहां ब्राह्मण-प्रभावित शासन ने निचली जातियों पर ‘मुलक्करम’ (स्तन कर) लगाया।

नादर और एझावा महिलाओं को स्तन ढकने पर कर देना पड़ता था, जबकि ब्राह्मण महिलाएं करमुक्त थीं।

यह जातिगत भेदभाव का प्रतीक था, जो चन्नार विद्रोह (1813-1859) का कारण बना। नांगेली नामक महिला ने विरोध में अपने स्तन काट लिए, जिसके बाद यह कर समाप्त हुआ।

हरियाणा सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने PIL दाखिल की है। शास्त्री की पदयात्रा जारी है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं: “ऐसी टिप्पणियां सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाती हैं। इतिहास से सीखें, नफरत न फैलाएं।”

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