सोचिए, गाँव के विकास के लिए आए लाखों रुपये अचानक गायब हो जाएँ तो क्या होगा? बिल्कुल यही इन पाँचों ग्राम पंचायतों में हुआ है। राज्य वित्त निधि के इन खातों से जो पैसा निकला है, उसके लिए न तो कोई अधिकृत भुगतान प्रक्रिया अपनाई गई और न ही कोई सही कागज़ात हैं। ऐसा लगता है कि किसी ने चुपके से इन पैसों पर हाथ साफ कर दिया है।
इस मामले के सामने आने के बाद से गाँव वालों के साथ-साथ प्रशासन में भी हड़कंप मचा हुआ है। अब ये जाँच का विषय है कि आखिर ये लाखों रुपये किसकी जेब में गए और इस पूरे खेल के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। फिलहाल, सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि इस बड़े घोटाले की सच्चाई कब और कैसे सामने आती है।

