आजकल यूपी में चारों तरफ धुंध ही धुंध नज़र आ रही है। सुबह उठते ही लगता है जैसे किसी धुंधलके में आ गए हों। लेकिन ये सिर्फ कोहरा नहीं है, दोस्तों! ये तो हवा में घुला ज़हर है, जो हमारी साँसों के साथ अंदर जा रहा है। दिवाली के बाद से तो हालात और भी खराब हो गए हैं। कई शहरों में हवा इतनी ज़हरीली हो चुकी है कि अब साँस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, तो आपको थोड़ा सतर्क रहने की ज़रूरत है। खासकर अगर आप नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ या कानपुर जैसे बड़े शहरों में रहते हैं। इन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। AQI बताता है कि हवा कितनी साफ या प्रदूषित है, और जब ये 300 के ऊपर चला जाए तो समझ लीजिए कि स्थिति गंभीर है।
पिछले कुछ दिनों से तो नोएडा और गाजियाबाद में AQI 400 के पार चल रहा है, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि हवा में सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10) और अन्य प्रदूषक तत्व इतनी ज़्यादा मात्रा में हैं कि ये बच्चों, बुजुर्गों और साँस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। स्वस्थ लोगों को भी इससे गले में खराश, आँखों में जलन और साँस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं
लखनऊ और कानपुर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहाँ भी AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है, जिसका मतलब है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। बाकी शहरों जैसे आगरा, वाराणसी और प्रयागराज में भी हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है।
ये जो प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, उसके पीछे कई वजहें हैं। पराली जलाना, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, कंस्ट्रक्शन का काम और उद्योगों से होने वाला उत्सर्जन, ये सब मिलकर हमारी हवा को दूषित कर रहे हैं। ऊपर से अब ठंड बढ़ने लगी है, तो हवा की गति धीमी हो जाती है, जिससे प्रदूषक तत्व ज़मीन के करीब ही रह जाते हैं और धुंध की चादर बन जाती है।
तो दोस्तों, ऐसे में हमें खुद का और अपने परिवार का खास ख्याल रखना होगा। जब तक ज़रूरी न हो, बाहर निकलने से बचें, खासकर सुबह और शाम के समय। अगर बाहर निकलना ही पड़े तो मास्क ज़रूर पहनें। घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना भी एक अच्छा उपाय हो सकता है। और हाँ, प्रदूषण कम करने में अपनी तरफ से योगदान दें, जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें या साइकिल चलाएँ।

