Breaking
6 Mar 2026, Fri

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार 1 नवंबर आज स्थापना दिवस मना रही है, शनिवार शाम को लालकिले पर समारोह का आयोजन किया गया है. तो आज सुबह बीजेपी के चांदनी चौक सीट से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजकर आग्रह किया है कि भारत की राजधानी दिल्ली को उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत स्वरूप से जोड़ते हुए “इंद्रप्रस्थ” नाम दिया जाए.

उन्होंने कहा कि दिल्ली का इतिहास केवल हजारों वर्षों पुराना नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की आत्मा और पांडवों द्वारा बसाए गए “इंद्रप्रस्थ” नगर की जीवंत परंपरा का प्रतीक है.

सांसद ने अमित शाह से यह भी आग्रह किया है कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम “इंद्रप्रस्थ जंक्शन” किया जाए वहीं इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम “इंद्रप्रस्थ एयरपोर्ट” किया जाए तथा दिल्ली में किसी एक प्रमुख स्थान पर पांडवों की भव्य मूर्तियां स्थापित की जाएं क्योंकि दिल्ली को इंद्रप्रस्थ के रूप में पांडवों ने ही अपनी राजधानी बनाया था.

सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इस संबंध में अपने पत्र की प्रति दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव, केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी भेजी है.

पत्र में लिखा है कि इतिहास साक्षी है कि महाभारत काल में यहीं पर पांडवों ने अपनी राजधानी “इंद्रप्रस्थ” बसाई थी, जो अपने समय की सबसे समृद्ध, सुंदर और संगठित नगरी थी. यह वही भूमि है जहां से धर्म, नीति और लोककल्याण के सिद्धांतों पर आधारित शासन की शुरुआत हुई थी. दिल्ली केवल एक आधुनिक महानगर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा है और उसका वास्तविक नाम इंद्रप्रस्थ हमारी ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है. जब देश के अन्य ऐतिहासिक शहर जैसे प्रयागराज, अयोध्या, उज्जैन, वाराणसी आदि अपनी प्राचीन पहचान से पुनः जुड़ रहे हैं, तब दिल्ली को भी उसके मूल स्वरूप “इंद्रप्रस्थ” के रूप में सम्मान मिलना चाहिए. यह परिवर्तन न केवल ऐतिहासिक न्याय है, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी होगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने से आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश मिलेगा कि भारत की राजधानी केवल सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि धर्म, नीति और राष्ट्रधर्म का प्रतीक भी है.

खंडेलवाल ने कहा की दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने से इतिहास का पुनर्स्थापन होगा. भारत की राजधानी का प्राचीन नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ है. इसे पुनः अपनाना ऐतिहासिक न्याय और सांस्कृतिक सम्मान है. इससे सांस्कृतिक आत्मगौरव में वृद्धि होगी. ‘इंद्रप्रस्थ’ नाम भारत की सभ्यता, नीति और धर्मनिष्ठ शासन की भावना को दर्शाता है, जो आधुनिक भारत की आत्मा से मेल खाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक नवजागरण के विज़न के अनुरूप: देश अयोध्या, काशी और प्रयागराज की तरह अपने प्राचीन नगरों को पुनर्जीवित कर रहा है तो दिल्ली क्यों नहीं? उन्होंने यह भी आग्रह किया कि दिल्ली के किसी प्रमुख स्थल पर पांडवों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएं जो हमारे राष्ट्रीय चरित्र, त्याग, साहस, न्याय और धर्मपरायणता के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि ‘इंद्रप्रस्थ की पावन भूमि पर पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित करना भारत के इतिहास, संस्कृति और आस्था को जीवंत करने का कार्य होगा.’

बता दें कि दिल्ली के इतिहास में इंद्रप्रस्थ से दिल्ली तक की यात्रा का जिक्र किया जाये तो महाभारत काल (~3000 ईसा पूर्व) पांडवों ने हस्तिनापुर से राजधानी स्थानांतरित कर यमुना तट पर ‘इंद्रप्रस्थ’ नगर की स्थापना की. यह नगर धर्म, नीति और समृद्धि का प्रतीक था. मौर्य काल से गुप्त काल तक इंद्रप्रस्थ क्षेत्र व्यापार और संस्कृति का केंद्र रहा था. राजपूत काल (11वीं–12वीं सदी) तोमर राजाओं ने इसे ‘ढिल्लिका’ कहा, जिससे ‘दिल्ली’ नाम विकसित हुआ. सुल्तानत और मुगल काल में कुतुबुद्दीन ऐबक से शाहजहां तक दिल्ली ने कई रूप देखे जिसमें सिरी, तुगलकाबाद, फिरोजशाह कोटला और शाहजहानाबाद मुख्य हैं पर मूल केंद्र इंद्रप्रस्थ ही रहा वहीं ब्रिटिश काल (1911) में लुटियन्स दिल्ली को नई राजधानी के रूप में बनाया गया, लेकिन उसका भूगोल वही रहा जहाँ कभी पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ थी.

इससे पहले सीएम रेखा ने भी की थी मांग
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर “महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन” करने की सिफारिश पत्र लिखकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से की है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *