कल का दिन भारतीय सर्राफा बाजार के लिए किसी झटके से कम नहीं था। कल्पना कीजिए, आप जिस चीज को आसमान की ऊंचाइयों पर देख रहे थे, अचानक वह जमीन पर आ गिरे। पिछले काफी समय से सोने और चांदी की कीमतें जिस रफ़्तार से भाग रही थीं, कल उनमें आई गिरावट ने आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े अनुभवी निवेशकों तक को सोच में डाल दिया है।
एमसीएक्स (MCX) पर जो सोना ₹1,93,096 के अपने रिकॉर्ड स्तर पर शान से खड़ा था, वह अचानक 13% टूटकर ₹1,67,406 पर आ गया। चांदी का हाल तो और भी बुरा रहा; ₹4,20,048 का जादुई आंकड़ा छूने के बाद यह करीब 21% फिसलकर ₹3,32,002 पर बंद हुई। बाजार में आई इस ‘सुनामी’ के बाद हर किसी के मन में बस एक ही सवाल है—क्या अब सोने की चमक हमेशा के लिए फीकी पड़ गई है?
आखिर हुआ क्या? क्यों गिरी कीमतें?
इस बड़ी गिरावट के तार सीधे अमेरिका से जुड़े हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) का नया प्रमुख बनाने का फैसला लिया है। अब आप सोचेंगे कि अमेरिका के एक अधिकारी के नाम से हमारे सोने के दाम का क्या लेना-देना?
दरअसल, केविन वॉर्श को बाजार में सख्त फैसले लेने वाला माना जाता है। निवेशकों को डर है कि उनके आने के बाद ब्याज दरों में कटौती का दौर रुक सकता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है। जैसे ही डॉलर इंडेक्स चढ़ा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की बिकवाली शुरू हो गई।
एक और बड़ी वजह रही ‘मुनाफावसूली’। जनवरी के महीने में चांदी 42% और सोना 15% तक चढ़ चुका था। जब भी कोई चीज इतनी तेजी से बढ़ती है, तो एक समय के बाद उसमें सुधार (Correction) आना तय होता है। बाजार बस एक बहाने की तलाश में था, जो केविन वॉर्श की खबर ने दे दिया।
क्या तेजी का दौर खत्म हो गया है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसे ‘अंत’ कहना जल्दबाजी होगी। प्लसकैश (PlusCash) के सीईओ प्रणव कुमार जैसे जानकारों का कहना है कि यह एक लंबी दौड़ के बाद आने वाली छोटी सी थकान है। सोने और चांदी की बुनियाद अभी भी बहुत मजबूत है, और इसके पीछे ठोस कारण हैं:
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सेंट्रल बैंकों का भरोसा: दुनियाभर के बैंक आज भी अपनी सुरक्षा के लिए भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
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इंडस्ट्रियल डिमांड: चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में बढ़ रहा है, इसलिए इसकी मांग कम नहीं होने वाली।
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दुनिया के हालात: जब भी दुनिया में तनाव या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, लोग सोने को ही सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं।
तो अब निवेशक क्या करें?
अगर आप इस गिरावट को देखकर घबरा रहे हैं, तो रुकिए। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। अगर आप निवेश करना चाहते हैं, तो सारा पैसा एक बार में लगाने की गलती न करें।
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की तन्वी कंचन का कहना है कि ‘सिप’ (SIP) की तरह धीरे-धीरे खरीदारी करना ज्यादा समझदारी है। अपने पोर्टफोलियो का सिर्फ 5 से 10 फीसदी हिस्सा ही सोने-चांदी में रखें। फिलहाल चांदी में रिस्क थोड़ा ज्यादा है क्योंकि यह काफी ऊपर-नीचे हो रही है, जबकि सोना थोड़ा स्थिर है।
कुल मिलाकर, यह गिरावट खरीदारी का एक मौका हो सकती है, लेकिन जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से बचें।

