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6 Mar 2026, Fri

Italy: जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने देश भर के सभी सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पहनने पर बैन लगाने वाले कानून का बिल लाया है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी (Brothers of Italy Party) ने इस प्रस्ताव को “इस्लामिक और सांस्कृतिक अलगाववाद” से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

सार्वजनिक स्थानों बुर्का बैन इस विधेयक के मुताबिक, अब स्कूलों, विश्वविद्यालयों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य सभी सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। कानून का उल्लंघन करने वालों पर 300 से 3,000 यूरो (लगभग 27,000 रुपये से 2.7 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

बुर्का और नकाब क्या हैं?

बुर्का एक ऐसा पूरा कपड़ा होता है जो महिला को सिर से पांव तक ढक देता है, यहां तक कि आंखें भी जालीदार पर्दे के पीछे होती हैं। वहीं, नकाब केवल चेहरा ढकने वाली ड्रेस है, जिसमें आंखों के आसपास का हिस्सा खुला रहता है। इटली का नया कानून इन दोनों वस्त्रों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंधित करेगा।

धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कट्टरता

ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के सांसद एंड्रिया डेलमैस्ट्रो, जो इस विधेयक के निर्माताओं में से एक हैं, ने कहा कि “धार्मिक स्वतंत्रता पवित्र है, लेकिन इसे हमारे संविधान और राज्य के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।” उन्होंने इस कदम को देश में एकता और सामाजिक समरसता को बनाए रखने की दिशा में बताया।
फंडिंग भी होगी ट्रांसपेरेंट यह प्रस्ताव केवल बुर्का या नकाब पर प्रतिबंध तक सीमित नहीं है। इसमें उन धार्मिक संगठनों पर भी नई वित्तीय पारदर्शिता की शर्तें लगाई गई हैं जिनका इटली सरकार के साथ कोई औपचारिक समझौता नहीं है। वर्तमान में, किसी भी मुस्लिम संगठन को इटली में ऐसी मान्यता प्राप्त नहीं है। प्रस्तावित कानून के तहत, इन संगठनों को अपने सभी फंडिंग स्रोतों का खुलासा करना होगा, और फंडिंग केवल उन्हीं संस्थाओं से ली जा सकेगी जो राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा न बनें।

मस्जिदों के फंडिंग पर निगरानी

नए मसौदा कानून के तहत मस्जिदों और धार्मिक संस्थानों के लिए विदेशी फंडिंग पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे “कट्टरपंथी प्रभाव” और “धार्मिक अलगाववाद” पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इस कानून से धार्मिक संगठनों को पारदर्शी तरीके से वित्तीय सहायता प्राप्त करने की बाध्यता होगी।

वर्जिनिटी टेस्ट और जबरन विवाह पर सजा

विधेयक में नए आपराधिक प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इसमें वर्जिनिटी टेस्ट जैसे अमानवीय कृत्यों को अपराध घोषित किया गया है, साथ ही धार्मिक दबाव या जबरन विवाह को भी गंभीर दंडनीय अपराध माना गया है। कानून यह सुनिश्चित करेगा कि महिलाओं को किसी भी धार्मिक या सामाजिक दबाव में जबरन विवाह के लिए बाध्य न किया जाए।

यूरोपीय देशों में पहले से लागू हैं ऐसे कानून

फ्रांस 2011 में बुर्का पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला पहला यूरोपीय देश था। उसके बाद ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, ट्यूनीशिया, और श्रीलंका सहित 20 से अधिक देशों ने इस तरह के प्रतिबंध लागू किए हैं। यहां तक कि मुस्लिम देश होने के बावजूद तुर्किए ने भी बुर्के पर बैन लगा रखा है। यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने भी 2017 में बेल्जियम के बुर्का प्रतिबंध को वैध ठहराया था, यह कहते हुए कि ऐसे कानून “सामाजिक सामंजस्य” के लिए आवश्यक हैं।पहले भी लगाए गए थे क्षेत्रीय प्रतिबंध इटली के उत्तरी क्षेत्र लोम्बार्डी (Lombardy) ने 2015 में ही सार्वजनिक भवनों और अस्पतालों में ढके हुए चेहरों के साथ प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब, नया कानून पूरे देश में इस नियम को लागू करेगा, जिससे यह क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबंध बन जाएगा।

संसद में मजबूत समर्थन, फिर कैसा विवाद?

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन संसद में बहुमत रखता है, इसलिए इस कानून के पारित होने की संभावना काफी अधिक है। हालांकि, मुस्लिम समुदायों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून “सांस्कृतिक एकीकरण” के बजाय “धार्मिक विभाजन” को बढ़ावा देगा।

एकीकरण बनाम अलगाव की बहस

इटली में इस प्रस्ताव को लेकर सामाजिक बहस तेज हो गई है। सरकार इसे सुरक्षा और समानता के लिए आवश्यक मानती है, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक पहचान पर प्रहार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में इस कानून को कितनी सहमति और कितनी चुनौती मिलती है।

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