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3 Mar 2026, Tue

पल्लवी पटेल को मंत्री की चेतावनी: फॉर्म नहीं भरा तो कट जाएगा नाम, न वोट दे पाएंगी न चुनाव लड़ पाएंगी…

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों वोटर लिस्ट के सर्वे (SIR) को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जब इस सर्वे में लगे कर्मचारियों की दिक्कतों और मौतों का मुद्दा उठाया, तो योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मोर्चा संभाल लिया। बलिया सदर से विधायक दयाशंकर सिंह ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए साफ़ कर दिया है कि यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए बहुत जरूरी है।

“शुद्धिकरण से क्यों डर रहे हैं आप?”
दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट का यह सर्वे (SIR) पहली बार नहीं हो रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि ऐसा 2003 में भी हुआ था। उनका कहना है कि जब-जब चुनाव आयोग को लगता है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है, तब-तब शुद्धिकरण का यह अभियान चलाया जाता है। मंत्री जी ने तंज कसते हुए कहा कि इस सर्वे से सिर्फ वही लोग परेशान हैं, जिन्होंने जगह-जगह अपने फर्जी वोटर बनवा रखे हैं।

हर विधानसभा से कटेंगे 35 से 40 हजार नाम?
दयाशंकर सिंह ने एक बहुत बड़ा दावा किया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि इस सर्वे के बाद शायद ही कोई ऐसी विधानसभा बचेगी, जहां से 35 से 40 हजार फर्जी वोट कम न हों। उन्होंने समझाया कि इस अभियान का मकसद उन लोगों के नाम हटाना है जो:

  • अब उस जगह पर रहते ही नहीं हैं (शिफ्ट हो गए हैं)।

  • जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

  • या फिर जिनका नाम 3-4 जगहों पर वोटर लिस्ट में चल रहा है।

दयाशंकर सिंह ने कहा, “अब एक वोटर एक ही जगह रहेगा। इससे विपक्ष डरा हुआ है क्योंकि अब उनके फर्जी वोट नहीं पड़ पाएंगे।”

पल्लवी पटेल को सीधी चेतावनी
सपा विधायक पल्लवी पटेल द्वारा सर्वे का फॉर्म (SIR फॉर्म) न भरने की बात पर भी दयाशंकर सिंह ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने दो-टूक कहा कि यह किसी का निजी अभियान नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग और लोकतंत्र का मामला है।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर वो फॉर्म नहीं भरेंगी, तो उनका नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा। नाम कट गया तो न वोट डालने का अधिकार बचेगा और न ही चुनाव लड़ने का। फिर 4 तारीख के बाद ऐसे लोग लाइन में ही लगे रह जाएंगे।”

कुल मिलाकर, मंत्री दयाशंकर सिंह ने साफ कर दिया है कि सरकार और चुनाव आयोग का मकसद वोटर लिस्ट को एकदम पारदर्शी बनाना है, चाहे विपक्ष इसका कितना भी विरोध क्यों न करे।

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