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6 Mar 2026, Fri

परेश रावल की फिल्म का भांडाफोड़: ताजमहल को ‘मंदिर’ बताकर ठगा, पहले मूर्तियों का मजाक उड़ाया – अब डबल गेम एक्सपोज!

परेश रावल की ‘द ताज स्टोरी’ पर लगा ‘बेबुनियाद’ का ठप्पा – ताजमहल शाहजहां का बनवाया स्मारक है, न कि कोई मंदिर! पुरानी फिल्म में भी मूर्तियों का मजाक उड़ाने का विवाद
नई दिल्ली, 7 नवंबर 2025 – बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल की फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। फिल्म में ताजमहल को ‘तक महल’ या ‘तेजो महल’ बताकर जबरन कब्जे और मंदिर होने की थ्योरी पेश की गई है, लेकिन इसकी कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक बुनियाद नहीं है। विशेषज्ञों ने साफ कर दिया है कि ताजमहल ताजमहल ही है – मुगल सम्राट शाहजहां ने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में 1632 से 1653 के बीच बनवाया था। यह कोई प्राचीन हिंदू मंदिर नहीं है।

फिल्म में दिखाया गया है कि ताजमहल राजा जय सिंह का ‘तक महल’ था, जिस पर शाहजहां ने कब्जा कर लिया। लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्पष्ट किया था कि ताजमहल का पूरा निर्माण शाहजहां के समय हुआ था। जमीन खरीद के दस्तावेज, मजदूरों के रिकॉर्ड, और फारसी अभिलेख (बादशाहनामा) – सब कुछ मौजूद है। ‘तेजो महल’ या ‘तक महल’ नाम का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा, “यह फिल्म इतिहास नहीं, अफवाहों का सिनेमा है। ताजमहल की नींव से लेकर गुंबद तक – हर पत्थर मुगल काल का है। कार्बन डेटिंग, ईंटों की बनावट, और वास्तुकला – सब शाहजहां के समय की पुष्टि करते हैं। मंदिर होने का दावा बिल्कुल बेबुनियाद है।”

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. रजत दत्ता ने भी चेतावनी दी: “ऐसी फिल्में समाज में भ्रम फैलाती हैं। ताजमहल यूनेस्को विश्व धरोहर है, और इसका निर्माण इतिहास में दर्ज है। ‘मंदिर था’ कहना वैज्ञानिक रूप से असंभव है।”

फिल्म में CGI से शिवलिंग दिखाने पर भी सवाल उठे। ASI के पूर्व अधिकारी ने कहा, “ताजमहल के अंदर कोई मंदिर अवशेष नहीं मिला। 2000 में हुई खुदाई में भी सिर्फ मुगल काल के अवशेष मिले।”

परेश रावल का पुराना विवाद फिर गरमाया
इसी बीच, परेश रावल की एक पुरानी फिल्म का जिक्र भी हो रहा है, जिसमें उन्होंने हिंदू मूर्तियों का मजाक उड़ाया था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे क्लिप में रावल का किरदार मूर्ति को “पत्थर का टुकड़ा” कहकर हंसी उड़ाता नजर आता है। यूजर्स ने लिखा: “पहले मूर्तियों का अपमान, अब ताजमहल को मंदिर बताकर भावनाएं भड़काना – परेश रावल का डबल स्टैंडर्ड?” इस क्लिप ने #BoycottPareshRawal को फिर से ट्रेंड करा दिया।

परेश रावल ने कहा, “हम सवाल उठा रहे हैं।” लेकिन दर्शकों का जवाब साफ है – “सवाल बेबुनियाद हों तो जवाब भी बेबुनियाद ही होगा!” सोशल मीडिया पर #TajIsTaj ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने लिखा: “परेश रावल सर, अच्छी फिल्म बनाइए, व्हाट्सएप फॉरवर्ड नहीं।”

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हो रही है। CBFC ने भी डिस्क्लेमर जोड़ा है: “फिल्म में दिखाए गए दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।”

निष्कर्ष: ताजमहल शाहजहां का बनवाया प्रेम स्मारक है। न मंदिर, न कब्जा, न ‘तेजो महल’ – सिर्फ ताजमहल। फिल्म की कहानी मनोरंजन तक सीमित रहनी चाहिए थी, लेकिन अब यह इतिहास के साथ खिलवाड़ और धार्मिक भावनाओं से खेल का उदाहरण बन गई है।

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