लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में धर्मांतरण का गोरखधंधा चलाने वाला मलखान बहुत ही शातिर दिमाग का आदमी है। वह निगोहां के मेहंदौली गांव के बकतौरी खेड़ा में रहता था। पिछले दो साल से वह पादरी बनकर लोगों को ईसाई धर्म में बदलने का काम कर रहा था। उसने अपने कुछ साथियों की मदद भी ली। उसने एक खेत में एक बड़ा हॉल बनवाया था। इस हॉल को उसने चर्च जैसा बना दिया था।
हर रविवार और गुरुवार को इस हॉल में बहुत भीड़ जमा होती थी। यहां ईसाई धर्म की प्रार्थना सभाएं होती थीं। ग्रामीण उसकी इन गतिविधियों पर नजर रखते थे। जब भी कोई ग्रामीण यह जानने के लिए झांकता कि अंदर क्या हो रहा है, तो मलखान तुरंत संस्कृत में बोलना शुरू कर देता था। वह ऐसा इसलिए करता था ताकि ग्रामीणों को यह शक न हो कि वह ईसाई धर्म का प्रचार कर रहा है। उसकी यह चाल बहुत समय तक काम आई। पुलिस ने रविवार को मलखान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को उसके पास से बाइबल मिली है। ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़ी और भी सामग्री बरामद हुई है। पुलिस की जांच में यह सब बातें सामने आई हैं।
बैंक खातों को खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब मलखान के पैसों की भी जांच कर रही है। पता चला है कि उसके दो अलग-अलग बैंकों में खाते हैं। पुलिस इन दोनों बैंक खातों की पूरी जानकारी खंगाल रही है। वह जानना चाहती है कि उसके पास इतना पैसा कहां से आया। वहीं, गांव के लोग भी कुछ मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर प्रार्थना हॉल बना है, उसकी नपाई होनी चाहिए। वे जानना चाहते हैं कि वह जमीन किसकी है। यह पता चलना चाहिए कि प्रार्थना सभा का यह हॉल किसकी जमीन पर बना है।
मोहनलाल गंज में बढ़ती जा रही चर्च की संख्या
लखनऊ के मोहनलालगंज, नगराम, निगोहां और गोसाईंगंज के कुछ इलाकों में पिछले लगभग तीन दशकों से बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही है। मलखान गरीब और दलित वर्ग के एक हजार से अधिक ग्रामीणों को झांसी देकर ईसाई धर्म में ला चुका है। वह उनकी आर्थिक मदद करता था। अकेले बकतौरी खेड़ा में उसने 500 हिंदुओं को ईसाई बना दिया। इन क्षेत्रों में अब पांच बड़े चर्च और कुछ छोटे चर्च स्थापित हो चुके हैं। 80 और 90 के दशक में मोहनलालगंज में केवल एक ही चर्च था।

