पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज संविधान की प्रतियां हाथ में थामे कोलकाता की सड़कों पर उतरकर विशेष गहन संशोधन (SIR) के खिलाफ एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली को ‘संविधान बचाओ मार्च’ का नाम दिया गया है, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए। ममता ने इसे ‘चुपचाप चुनावी धांधली’ करार देते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा।
रैली डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि से शुरू हुई और रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर जोरासांको ठाकुरबाड़ी पर समाप्त हुई। सफेद साड़ी और चप्पलों में सजी ममता बनर्जी ने मार्च का नेतृत्व किया, जबकि उनके भतीजे और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। समर्थकों ने TMC के झंडे लहराते हुए नारे लगाए और रंग-बिरंगे पोस्टर्स दिखाए, जिन पर लिखा था- ‘संविधान हानि न हो, SIR बंद करो’।
ममता ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, “यह SIR केवल वोटर लिस्ट की सफाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला है। केंद्र सरकार और BJP ‘अदृश्य धांधली’ के जरिए बंगाल के हर वैध नागरिक को वोट का हक छीनना चाहती है। हम संविधान की रक्षा करेंगे, चाहे इसके लिए सड़क पर उतरना पड़े। कोई भी असली बंगाली या भारतीय नागरिक बाहर नहीं होगा, लेकिन घुसपैठियों को फायदा पहुंचाने का खेल बंद होना चाहिए।” उन्होंने BJP पर ‘संविधान हत्या दिवस’ जैसे कदमों के जरिए लोकतंत्र को कमजोर करने का भी आरोप लगाया।
TMC के इस विरोध को विपक्ष ने तीखा जवाब दिया है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘परिवार बचाओ अभियान’ करार देते हुए कहा, “2005 में ममता खुद ही घुसपैठियों के खिलाफ आवाज उठाती थीं, आज वही वोट बैंक बचाने के लिए संविधान का अपमान कर रही हैं। SIR संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत वैध है, लेकिन TMC इसे रोकने के लिए दंगे भड़काने की धमकी दे रही है।” BJP ने चुनाव आयोग से TMC कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की मांग की है।
यह रैली 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई है, जब SIR के तहत वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण शुरू हो चुका है। TMC का दावा है कि इससे लाखों वैध वोटर प्रभावित होंगे, जबकि BJP इसे ‘नकली वोटरों’ की सफाई बता रही है। दक्षिण भारत के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी SIR का विरोध किया है, जिससे विपक्षी एकता की संभावना बढ़ गई है।
ममता की इस रैली ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। क्या यह ‘खेला’ का नया दौर होगा या संविधान पर बहस तेज कर देगा? आने वाले दिनों में इसका असर साफ दिखेगा।

