कर्नाटक की राजनीति में आजकल एक बयान को लेकर खूब गहमागहमी है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने हाल ही में ‘धर्म परिवर्तन’ के मुद्दे पर कुछ ऐसा कह दिया है, जिसने बीजेपी को उन पर हमला करने का एक और मौका दे दिया। बीजेपी का आरोप है कि सिद्दारमैया का यह बयान हिंदू विरोधी है, जबकि कांग्रेस और खुद सिद्दारमैया इसे अपनी बात का बचाव बता रहे हैं।
मामला तब शुरू हुआ जब सिद्दारमैया ने विधानसभा में ‘धर्मांतरण विरोधी विधेयक’ पर चर्चा के दौरान अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अगर अपनी मर्जी से धर्म बदलता है, तो उसमें गलत क्या है? उनका कहना था कि संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद का धर्म चुनने की आजादी देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई एक धर्म छोड़कर दूसरा अपनाना चाहता है, तो उसे जबरदस्ती रोकना कहां तक सही है?
बीजेपी ने इस बयान को तुरंत लपक लिया और सिद्दारमैया पर ‘हिंदू विरोधी’ होने का आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि सिद्दारमैया धर्म परिवर्तन को बढ़ावा दे रहे हैं और इससे राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है। बीजेपी के नेताओं ने मुख्यमंत्री से माफी मांगने की भी मांग की।
हालांकि, सिद्दारमैया ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ हैं, लेकिन अगर कोई स्वेच्छा से ऐसा करता है, तो उस पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
कांग्रेस पार्टी भी अपने मुख्यमंत्री के बचाव में उतर आई है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सिद्दारमैया ने सिर्फ संवैधानिक अधिकारों की बात की है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनका मानना है कि बीजेपी इस मुद्दे को बेवजह उछालकर कर्नाटक में ध्रुवीकरण की राजनीति करना चाहती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में कितनी दूर तक जाता है। फिलहाल, सिद्दारमैया का यह बयान राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक गरमाहट देखने को मिल सकती है।

