महाराष्ट्र की राजनीति का वो चेहरा, जिसे लोग प्यार से ‘दादा’ कहते थे और जिनकी धाक पूरे सूबे में थी, अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार को बारामती में हुए एक दर्दनाक प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया। वे बारामती में एक चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए मुंबई से निकले थे, लेकिन लैंडिंग से ठीक पहले विमान के निचले हिस्से में आग लग गई और यह भीषण हादसा हो गया।
36 साल का सफर और एक भी हार नहीं
अजित दादा की पहचान सिर्फ एक नेता की नहीं थी, वे राजनीति के ‘अजेय योद्धा’ थे। अपने 36 साल के लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कभी हार का स्वाद नहीं चखा। चाहे लोकसभा हो या 8 बार विधानसभा, बारामती की जनता ने हमेशा अपने ‘दादा’ पर भरोसा जताया। वे 6 बार राज्य के डिप्टी सीएम बने, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। उन्होंने 4 अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया, जिससे पता चलता है कि वे प्रशासन चलाने में कितने माहिर और अनुभवी थे।
मां का वो अधूरा सपना
अजित पवार के जाने से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी मां आशा पवार हमेशा से अपने बेटे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती थीं। अफ़सोस कि मां का यह सपना अधूरा ही रह गया। परिवार में अभी कुछ वक्त पहले ही खुशियों ने दस्तक दी थी; पिछले साल दिसंबर में उनके बेटे जय की शादी हुई थी। घर में नई बहू आई थी और माहौल जश्न का था, लेकिन किसी को क्या पता था कि इतनी जल्दी ऐसी खबर सुनने को मिलेगी।
अजित पवार अपने पीछे पत्नी सुनेत्रा पवार (जो वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं) और दो बेटों पार्थ और जय को छोड़ गए हैं। जय की शादी ऋतुजा पाटिल से हुई है, जबकि पार्थ अभी अविवाहित हैं।
राजनीति और रिश्तों की उलझन
शरद पवार के भतीजे के तौर पर राजनीति शुरू करने वाले अजित दादा ने अपने चाचा से राजनीति के हर दांव-पेंच सीखे थे। हालांकि, बीच में राजनीतिक विचारधाराओं की वजह से दूरियां जरूर आईं, लेकिन हाल के दिनों में कड़वाहट कम होने लगी थी। चर्चा थी कि शरद पवार और अजित पवार के दोनों गुट फिर से एक हो सकते हैं। हाल ही में हुए पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के चुनावों में दोनों ने साथ मिलकर ही चुनाव लड़ा था।
अजित पवार शरद पवार ने भतीजे के तौर पर राजनीति में चमके। उन्हें शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के साथ उनका राजनीतिक वारिस माना गया लेकिन बीजेपी के साथ जाने पर दोनों के रिश्ते टूट गए थे, हालांकि विधानसभा चुनावों के बाद दाेनों परिवारों में नजदीकी बढ़ी थी। ऐसी चर्चा थी कि जल्द ही एनसीपी के दोनों खेमें एक हो जाएंगे। इसी महीने संपन्न हुए महानगरपालिका चुनावों में अजित पवार की एनसीपी ने शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) के साथ मिलकर ही पुणे और पिंपरी चिंचवड़ के चुनाव लड़े थे।

