क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया का सबसे बड़ा बांध (Dam) कैसा दिखता होगा? शायद आपके दिमाग में ‘Hoover Dam’ या चीन के बड़े-बड़े कंक्रीट के स्ट्रक्चर्स की तस्वीर आ रही होगी। लेकिन सच तो ये है कि दुनिया का सबसे बड़ा बांध किसी सरकार ने नहीं, किसी बड़ी मशीन से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे जानवरों ने बनाया है।
ये बांध इतना बड़ा है कि ये अंतरिक्ष (Space) से भी साफ़ नज़र आता है। और सबसे चौंकाने वाली बात? इसकी लंबाई मशहूर ‘Hoover Dam’ से भी दोगुनी है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर वो कौन सा जीव है जिसमें इतनी समझ और ताकत है? इसका जवाब है— Beavers (बीवर्स)।
वही छोटे से जीव जो अक्सर लकड़ी चबाते हुए दिखते हैं। इनके पास न कोई इंजीनियरिंग की डिग्री है, न कोई नक्शा और न ही इन्हें क्लाइमेट चेंज की कोई चिंता है। लेकिन जब 2007 में वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट तस्वीरों में एक विशाल ढांचा देखा, तो उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। उन्हें लगा शायद ये कोई टेक्निकल खराबी है, क्योंकि ये मानना नामुमकिन था कि इतने छोटे जानवर पूरी ज़मीन का नक्शा बदल सकते हैं।
लेकिन इसके पीछे की कहानी और भी दिलचस्प है।
बात है साल 1948 की। अमेरिका के इडाहो (Idaho) में ये बीवर्स इंसानों के लिए सिरदर्द बन गए थे। वे खेतों और रास्तों में रुकावट पैदा कर रहे थे। सरकार के पास दो रास्ते थे: या तो उन्हें मार दिया जाए या कहीं और शिफ्ट कर दिया जाए। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना, लेकिन तरीका बहुत ही अजीब था। इन बीवर्स को लकड़ी के बक्सों में बंद किया गया और पैराशूट की मदद से घने जंगलों में ऊपर से गिरा दिया गया।
अगले 70 सालों तक किसी ने इनकी सुध नहीं ली। लेकिन जब आधुनिक दौर में NASA के वैज्ञानिकों ने धरती की हरियाली और पानी के पैटर्न को मैप करना शुरू किया, तो उन्हें कुछ ‘अजीब’ बदलाव दिखे।
जंगल के कुछ हिस्से बाकी जगहों के मुकाबले बहुत ज़्यादा हरे-भरे थे। वहाँ सूखे के वक्त भी पानी की कमी नहीं थी और ताज्जुब की बात ये थी कि जंगलों में आग लगने के बावजूद ये इलाके पूरी तरह सुरक्षित थे। जब गहराई से जाँच हुई, तो पता चला कि ये वही इलाके थे जहाँ 70 साल पहले उन बीवर्स को छोड़ा गया था।
ये नन्हे जीव कमाल कैसे करते हैं?
बीवर्स नदियों के बहाव को पूरी तरह रोकते नहीं हैं, बल्कि उसे धीमा कर देते हैं। उनके बनाए बांधों से पानी धीरे-धीरे रिसता है, जिससे आस-पास की मिट्टी पानी सोख लेती है और ‘Wetlands’ बन जाते हैं। ये वेटलैंड्स बाढ़ को रोकते हैं, सूखे के समय पानी बचाकर रखते हैं और कार्बन को सोखने में मदद करते हैं।
आज हम इंसान अरबों डॉलर खर्च करके जो काम करना चाह रहे हैं, ये छोटे से जीव बिना किसी शोर-शराबे के वही काम मुफ़्त में कर रहे हैं। वे सिर्फ जानवर नहीं हैं, वे प्रकृति के असली ‘इकोसिस्टम इंजीनियर्स’ हैं।
आज दुनिया भर में बीवर्स को बचाने और उन्हें सही जगहों पर बसाने की कोशिशें की जा रही हैं। क्योंकि हमें समझ आ गया है कि कभी-कभी कुदरत को ठीक करने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि हम बीच में दखल न दें और उसे अपना काम करने दें।

