राजनीति में ऐसे बहुत कम चेहरे होते हैं जिनका अनुशासन ही उनकी असली पहचान बन जाता है। गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उन्हीं में से एक हैं। आज वो अपना 84वां जन्मदिन मना रही हैं। 84 साल का यह पड़ाव सिर्फ एक उम्र नहीं, बल्कि एक ऐसे सफर की गवाही है जो स्कूल के क्लासरूम से शुरू होकर देश के सबसे बड़े सूबे के राजभवन तक पहुंचा है।
एक टीचर जिसने राजनीति को ‘डिसिप्लिन’ सिखाया
आज हम उन्हें एक कद्दावर नेता के रूप में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजनीति में आने से पहले वो एक बेहद सख्त और उसूलों वाली टीचर थीं? अहमदाबाद के एक स्कूल में विज्ञान पढ़ाने वालीं आनंदीबेन की छवि एक ऐसी शिक्षिका की थी, जो अनुशासन से कभी समझौता नहीं करती थीं। शायद यही वो गुण था जिसने उन्हें बाद में ‘लौह महिला’ (Iron Lady) का खिताब दिलाया।
कहा जाता है कि 1987 में एक स्कूल पिकनिक के दौरान दो लड़कियां नर्मदा नदी में डूब रही थीं, तब अपनी जान की परवाह किए बिना आनंदीबेन पानी में कूद गईं और उन्हें बचा लाईं। इसी निडरता ने उन्हें राजनीति के मैदान में भी हमेशा डटे रहने की हिम्मत दी।
मोदी की भरोसेमंद और गुजरात की पहली महिला CM
जब नरेंद्र मोदी 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने, तो सबसे बड़ा सवाल यह था कि गुजरात की गद्दी कौन संभालेगा? यह जिम्मेदारी आनंदीबेन पटेल को मिली। गुजरात जैसे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनना अपने आप में इतिहास रचने जैसा था। हालांकि, उनका कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के लिए किए गए उनके कामों को आज भी याद किया जाता है।
एक ‘सफल पारी’ जो अभी भी जारी है
अक्सर लोग उम्र के इस पड़ाव पर आकर रिटायरमेंट की सोचते हैं, लेकिन आनंदीबेन आज भी उतनी ही सक्रिय हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अब उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के तौर पर उनकी भूमिका एक मार्गदर्शक की रही है। राजभवन को आम लोगों और विशेषकर छात्राओं व महिलाओं के लिए सुलभ बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है।
प्रेरणा की मिसाल
आनंदीबेन पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि काम चाहे छोटा हो या बड़ा, अगर उसे अनुशासन और ईमानदारी से किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। एक साधारण परिवार की बेटी, एक बेहतरीन टीचर, एक सख्त प्रशासक और अब एक कुशल राज्यपाल—आनंदीबेन की यह यात्रा वाकई हर महिला के लिए प्रेरणा है।

