अभी हाल ही में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एक महिला बटालियन में 60 से भी ज़्यादा ट्रेनी महिला सिपाही (प्रशिक्षु महिला सिपाही) खाना खाने के बाद अचानक बीमार पड़ गईं। उन सभी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना दिखाती है कि खाने की गुणवत्ता कितनी ज़रूरी है, खासकर उन जगहों पर जहाँ लोग बड़ी संख्या में एक साथ रहते और खाते हैं।
बताया जा रहा है कि यह सब दूषित भोजन (contaminated food) की वजह से हुआ। यानी जो खाना उन्हें परोसा गया था, वह किसी न किसी तरह से खराब या संक्रमित था। हो सकता है कि खाना बनाते समय साफ़-सफाई का ध्यान न रखा गया हो, या फिर खाना सही तरीके से स्टोर न किया गया हो। जब इतनी सारी सिपाही एक साथ बीमार पड़ीं, तो इससे पूरे कैंप में हड़कंप मच गया।
इस तरह की घटनाएँ वाकई चिंताजनक होती हैं। जब हमारे देश की सुरक्षा में लगी महिलाएँ ही ऐसे खराब भोजन का शिकार होने लगें, तो यह कई सवाल खड़े करता है। अधिकारियों को इस मामले की पूरी जाँच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। महिला सिपाहियों को बेहतर और स्वच्छ भोजन मिलना उनका अधिकार है, ताकि वे अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान दे सकें और स्वस्थ रह सकें।
हमें उम्मीद है कि सभी बीमार सिपाही जल्द से जल्द ठीक होकर अपनी ड्यूटी पर लौटेंगी। यह घटना एक सबक है कि भोजन की गुणवत्ता (food quality) और स्वच्छता (hygiene) को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

