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16 Apr 2026, Thu

नवरात्रि के पावन पर्व का आज तीसरा दिन है, और इस दिन हम माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप, माँ चंद्रघंटा की आराधना करते हैं। इनका स्वरूप अत्यंत शांतिपूर्ण और सौम्य है, लेकिन दुष्टों का संहार करने में ये उतनी ही प्रचंड हैं। आइए जानते हैं माँ चंद्रघंटा का स्वरूप, उनकी पूजा विधि और इससे मिलने वाले फल के बारे में।

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप

माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके दस हाथ हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र जैसे तलवार, धनुष-बाण, गदा आदि शोभायमान हैं। इनकी सवारी सिंह है। इनका रंग स्वर्ण के समान चमकीला है और इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तत्पर दिखती है, लेकिन इनका मुखमंडल हमेशा शांत और सौम्य रहता है। इनकी घंटे की ध्वनि से दानव, दैत्य और राक्षसों कांप उठते हैं।

आराधना मंत्र

माँ चंद्रघंटा की आराधना के लिए यह मंत्र अत्यंत फलदायी है:

ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥

इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भय दूर होता है।

पूजा विधि और फल

आज के दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा पीले वस्त्र धारण कर करना शुभ माना जाता है। माँ को सफेद कमल और चमेली का फूल अति प्रिय है। आप उन्हें दूध से बनी मिठाइयों और खीर का भोग लगा सकते हैं।

माँ चंद्रघंटा की सच्चे मन से पूजा करने से भक्त को अलौकिक शांति मिलती है। इनके आशीर्वाद से साधक सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है। माँ चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस और पराक्रम प्रदान करती हैं, जिससे वे जीवन की हर कठिनाई का सामना कर सकें। इनकी कृपा से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

तो आइए, आज हम सभी माँ चंद्रघंटा की आराधना करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय और शांतिपूर्ण बनाएं।

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