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4 Mar 2026, Wed

Sardar Patel Jayanti 2025: आज 31 अक्टूबर 2025 को भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और ‘लौहपुरुष’ सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती मनाई जा रही है. आज का दिन राष्ट्रीय एकता दिवस यानी नेशनल यूनिटी डे  के रूप में भी मनाया जाता है. बता दें कि सरदार पटेल एक ऐसे नेता थे जिन्होंने केवल अपनी इच्छाशक्ति और राजनीतिक बुद्धि के बल पर 562 रियासतों को एकजुट कर भारत को टूटने से बचाया था. यही कारण है कि उनके मजबूत नेतृत्व की वजह से उन्हें लौहपुरुष भी कहा गया. इसी कड़ी में आज हम आपको उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें जानेंगे और साथ ही ये भी बताएंगे कि उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि कैसे मिली.

कैसे मिली ‘सरदार’ की उपाधि?

जब सरदार वल्लभभाई पटेल महात्मा गांधी जी के साथ जुड़े थे तो उनका पूरा जीवन ही बदल गया था. वे गांधी जी के विचारों से इतने प्रभावित हो गए थे कि उन्होंने अपना सारा जीवन देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया था. सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में जनता को एकजुट किया था और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकता का संदेश लोगों के बीच फैलाया था. इसके अलावा उन्होंने अहमदाबाद किसान आंदोलन और 1928 में बारडोली सत्याग्रह का एकदम सफल नेतृत्व किया था जिसके बाद उन्हें’सरदार’ की उपाधि मिली थी.

सरदार वल्लभभाई पटेल का असली नाम क्या था?

सरदार वल्लभभाई पटेल का असली नाम वल्लभभाई झावेरभाई पटेल था. उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था.

सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के प्रथम कौन थे?

स्वतंत्रता मिलने के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री बने थे. उन्होंने कड़े संघर्ष के बाद हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी 562 रियासतों को जोड़कर देश को अखंड भारत बनाया था. इसी के बाद उन्हें ‘Iron Man of India’ की उपाधि मिली थी.

सरदार के अनमोल विचार
  • भले ही हम हजारों की संपत्ति खो दें, और हमारा जीवन बलिदान हो जाए, हमें मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर और सत्य में अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए.
  • संस्कृति समझ-बूझकर शांति पर रची गई है. मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे. जो काम प्रेम, शांति से होता है, वह वैरभाव से नहीं होता.
  • हमें अपने देश की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए उतनी ही मेहनत करनी होगी, जितनी उसे पाने के लिए की थी.
  • जब जनता एक हो जाती है, तब उसके सामने क्रूर से क्रूर शासन भी नहीं टिक सकता. अतः जात-पांत के ऊंच-नीच के भेदभाव को भुलाकर सब एक हो जाइए.
  • मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए. लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा

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