
लखनऊ, 01 अक्टूबर 2025: दशहरा का पवित्र पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जहां भगवान राम ने रावण का वध कर न्याय की स्थापना की थी। उसी तरह, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एक निर्णायक जंग की जरूरत है। सवाल यह है कि क्या LDA के वाइस चेयरमैन प्रथमेश कुमार इस ‘भ्रष्टाचार रूपी रावण’ पर विजय प्राप्त कर पाएंगे? खासकर जोन-6 में, जहां भ्रष्टाचार की लंका सजी है, और अभियंता अंगद सिंह पर कथित तौर पर सील किए गए भूखंडों को संरक्षण देकर अवैध निर्माण करवाने के गंभीर आरोप हैं।
भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें

LDA में भ्रष्टाचार का जाल रावण के दस सिरों सा प्रतीत होता है—अवैध निर्माण, सीलिंग में साठगांठ, मानचित्र के विपरीत निर्माण, रिश्वतखोरी और नियमों की अनदेखी। सूत्रों के मुताबिक, जोन-6 में अभियंता अंगद सिंह सील किए गए भूखंडों को अपने संरक्षण में पूरा करवा रहा है। रिश्वत के बल पर बड़े व्यापारियों को संरक्षण मिल रहा है, जबकि गरीब और छोटे मकान बनाने वालों के घरों को सील कर उनके साथ अन्याय हो रहा है। नियम केवल कमजोर और निर्धन के लिए लागू हो रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग रिश्वत देकर नियमों को ताक पर रख रहे हैं।
प्रथमेश कुमार के सामने चुनौती
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के पास अवसर है। यदि वे जोन-6 के सील भूखंडों और अवैध निर्माणों की फाइलों की गहन जांच करें, तो अंगद सिंह के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकते हैं। हालांकि, भ्रष्टाचार का यह जाल इतना मजबूत है कि इसे तोड़ना आसान नहीं। दशहरा हमें सिखाता है कि राम ने नौ दिन युद्ध लड़ा और दसवें दिन रावण का अंत किया। क्या प्रथमेश कुमार भी ऐसे ही धैर्य और साहस के साथ LDA को भ्रष्टाचार मुक्त कर पाएंगे?
क्या इस दशहरा पर होगा ‘रावण दहन’?
यह दशहरा केवल उत्सव का नहीं, बल्कि LDA में सुशासन और पारदर्शिता की स्थापना का भी अवसर हो सकता है। सवाल यही है—क्या इस बार भ्रष्टाचार का ‘रावण दहन’ होगा, या अवैध निर्माणों की लंका ऐसे ही सजी रहेगी ?
यह दशहरा तय करेगा कि क्या लखनऊ विकास प्राधिकरण में न्याय और अच्छाई की जीत होगी!
