हिमालय की गोद में बसे भगवान विष्णु के आठवें बैकुंठ, श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूरे विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। जैसे ही मंदिर के भारी द्वार खुले, पूरा परिसर ‘जय बद्री विशाल’ के जयकारों से गूंज उठा। पिछले कई महीनों से इस पल का इंतज़ार कर रहे हजारों श्रद्धालुओं की आँखों में आज एक अलग ही खुशी और सुकून देखने को मिला।
भक्तिमय माहौल और सेना का बैंड
सुबह के वक्त जब मंदिर के कपाट खुले, तो नजारा देखने लायक था। सेना के बैंड की सुमधुर धुनों और वैदिक मंत्रोच्चार ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। कपाट खुलने से पहले मंदिर को क्विंटल फूलों से सजाया गया था, जिसकी खुशबू पूरी घाटी में फैली हुई थी। कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं था; लोग रात से ही कतारों में खड़े होकर भगवान के पहले दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।
मुख्य पुजारी ने की पहली पूजा
परंपरा के अनुसार, मुख्य पुजारी (रावल जी) ने भगवान बद्री विशाल के गर्भगृह में प्रवेश किया और माता लक्ष्मी को मंदिर के भीतर विराजमान किया। इसके बाद भगवान का अभिषेक किया गया और भक्तों के लिए दर्शन शुरू हुए। अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालु भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
इस बार क्या है खास?
इस साल चारधाम यात्रा को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। हालांकि पहाड़ों में मौसम थोड़ा सर्द है, लेकिन भक्तों की आस्था ठंड पर भारी पड़ती दिख रही है। बद्रीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही अब उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुकी है।
अगर आप भी इस साल बद्रीनाथ जाने का मन बना रहे हैं, तो यकीन मानिए वहां का दिव्य वातावरण आपकी सारी थकान मिटा देगा। भगवान बद्री विशाल का आशीर्वाद लेने के लिए यह सबसे सुंदर समय है।

