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5 Mar 2026, Thu
रामपुर : सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव आज रामपुर में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात करेंगे. राजनीति के जानकारों के अनुसार ये मुलाकात सामान्य नहीं, बल्कि राजनीतिक मायनों से बेहद अहम मानी जा रही है. गौरतलाब है कि कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाली बीएसपी की बड़ी रैली से ठीक एक दिन पहले हो रही यह बैठक प्रदेश की राजनीति में नई दिशा तय कर सकती है. सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात से आजम के बसपा में शामिल होने की चर्चाओं पर भी पूरी तरह विराम लगने की संभावना है.
गौरतलब है कि आजम खान के जेल से छूटने के बाद उनके बीएसपी में जाने की चर्चाएं लगातार तेज़ थीं. ऐसे में बसपा की रैली से ठीक पहले अखिलेश यादव का रामपुर जाना डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि अखिलेश इस मुलाकात के ज़रिए स्पष्ट संकेत देना चाहते हैं कि आजम खान अब भी सपा परिवार का अहम हिस्सा हैं और दोनों के बीच कोई मतभेद नहीं है. हालांकि आजम खान का सख्त रुख इस तरफ संकेत दे रहा है कि दोनों में सब कुछ सही नहीं है. गौरतलब है कि आजम खान ने नाराजगी जताते हुए साफ कहा था कि ‘यह सिर्फ दो लोगों की मुलाकात होगी, किसी तीसरे के लिए जगह नहीं है. चाहे वो कोई भी हो.
रामपुर में सियासी हलचल तेज
इस बीच रामपुर में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 15 दिनों के अंतराल के बाद करीब 12:30 बजे रामपुर आ रहे हैं. इस बार उनका मकसद कुछ खास है. दोनों नेताओं की मुलाकात के कई सियासी मायने तो हैं ही. साथ ही उनके बसपा में जाने की चर्चाओं पर भी विराम लग जाएगा. हालांकि, वो खुद किसी दूसरी पार्टी में जाने की बात को नकार चुके हैं.
आजम खान ने कसा तंज
आजम खान ने अखिलेश यादव की मुलाकात पर कहा कि अखिलेश उनकी सेहत और खैरियत लेने आ रहे हैं और यह उनका हक भी है. तंज भरे अंदाज में उन्होंने कहा की लोगों का बड़प्पन है कि एक मुर्गी चोर, बकरी चोर से मिलने आ रहे हैं. उस केस में 21 साल की सजा और 34 लाख का जुर्माना हुआ है. आप सबके ज़रिए मैं दरख्वास्त कर रहा हूं, मेरे घर को कोई खरीद ले आखिर एक मुर्गी चोर कितना जुर्माना दे सकता है.
क्या होगा मुलाकात का असर ?
अब यह मुलाकात केवल औपचारिकता है या फिर समाजवादी पार्टी में पड़ी दूरियों को मिटाने की शुरुआत यह देखने वाली बात होगी. रामपुर की सियासी गलियों में चर्चाएं तेज हैं कि क्या अखिलेश यादव और आजम खान फिर से पहले जैसी नजदीकी और भरोसे के साथ साथ दिखाई देंगे. सपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व मुखमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले आजम खान की बेस्ट यूपी और मुस्लिम समुदाय के बीच बड़ी पकड़ है. यही वजह है कि सपा चाहती है उनका कद और प्रभाव पार्टी के साथ बरकरार रहे ताकि आगामी चुनावों में मुस्लिम वोटों का भरोसा सपा से न हटे.

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