अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक ऐसा चमत्कार हुआ है, जिसने दुनिया भर में फैली नफरत की आग को ठंडा करने का काम किया है। ज़ोहरान ममदानी, एक मुस्लिम पृष्ठभूमि के युवा नेता, जिनका नाम “अब्दुल” जैसा ही लगता है (हालांकि उनका पूरा नाम ज़ोहरान क्वामी ममदानी है), ने न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा (State Assembly) के चुनाव में शानदार जीत हासिल की है। यह जीत न सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उन तमाम आवाज़ों के लिए एक ज़ोरदार जवाब है जो कहते हैं कि “मुस्लिम सिर्फ़ पंचर बनाते हैं, एमएलए नहीं बन सकते”!
ज़ोहरान, जो युगांडा में जन्मे और न्यूयॉर्क में पले-बढ़े, एक प्रगतिशील डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं। 33 साल की उम्र में उन्होंने क्वींस के 36वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा और 65% से ज़्यादा वोट हासिल कर अपनी सीट बरकरार रखी। उनकी जीत का राज़? सामाजिक न्याय, किफायती आवास, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ़ लड़ाई और आप्रवासन नीतियों में सुधार। ज़ोहरान ने अपनी कैंपेन में साफ़ कहा, “मेरा नाम, मेरी पहचान या मेरा धर्म – ये कुछ भी मेरी क्षमता को परिभाषित नहीं करता। मैं यहाँ हर उस इंसान के लिए लड़ रहा हूँ जो संघर्ष कर रहा है, चाहे वो किसी भी पृष्ठभूमि का हो।”
यह ख़बर उन लोगों के लिए ख़ास तौर पर कड़वी गोली है जो सोशल मीडिया पर या सड़कों पर चिल्लाते फिरते हैं कि मुस्लिम समुदाय सिर्फ़ “पंचर ठीक करने” या छोटे-मोटे कामों तक सीमित है। ज़ोहरान की तरह ही भारत में भी कई “अब्दुल” एमएलए, सांसद और यहाँ तक कि मुख्यमंत्री बन चुके हैं। याद कीजिए अब्दुल्ला अब्दुल्ला को (जम्मू-कश्मीर), या सैयद अब्दुल्ला बुखारी को। ज़ोहरान की जीत बता रही है – प्रतिभा और मेहनत के आगे नाम का कोई मायने नहीं। अगर “अब्दुल” पंचर बना सकता है, तो वो विधानसभा की सीट भी जीत सकता है!
ज़ोहरान ने अपनी जीत के बाद कहा, “यह जीत मेरी नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की है जो सपने देखते हैं लेकिन नफरत की दीवारों से घिरे हैं। आइए, हम सब मिलकर ऐसी दुनिया बनाएँ जहाँ हर ‘अब्दुल’ एमएलए बने, न कि सिर्फ़ पंचर वाला!”
यह न्यूज़ नफरत फैलाने वालों को चेतावनी है: आपकी घृणा अब पुरानी पड़ चुकी है। अब समय है बदलाव का, समावेश का। ज़ोहरान ममदानी जैसी कहानियाँ साबित करती हैं – “अब्दुल” सिर्फ़ पंचर नहीं बनाता, वो इतिहास भी रचता है!

