लखनऊ, 10 नवंबर 2025 : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माणों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के जोन-4 में जूनियर इंजीनियर (जेई) हेमंत कुमार पर भ्रष्टाचार और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार इस ‘भ्रष्ट अभियंता’ पर क्यों मेहरबान हैं? क्या योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अब सिर्फ कागजों तक सिमट गई है?
अलीगंज सेक्टर के. में खुलेआम जारी है अवैध निर्माण
जोन-4 के अंतर्गत अलीगंज के सेक्टर-के में एक्सिस बैंक के ठीक बगल में एक अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तेजी से आकार ले रहा है। यह निर्माण न केवल मानचित्र स्वीकृति के विपरीत है, बल्कि इसमें हर तरह के निर्माण मानकों का खुला उल्लंघन हो रहा है। बेसमेंट में अनियमितताएं सामने आई हैं, जबकि सेटबैक नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज कर 100% सेटबैक कवर कर लिया गया है—यह एलडीए के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
कपूरथला मेन रोड पर जारी हैं कई अवैध निर्माण
कपूरथला रोड पर स्थिति और भी खराब है। यहां एक नहीं, बल्कि कई अवैध निर्माण भ्रष्ट अभियंता हेमंत के संरक्षण में खुलेआम हो रहे हैं।
अभियंता हेमंत कुमार कागजों में करता है सीलिंग और ध्वस्तीकरण
सहाय एनक्लेव कॉलोनी (रैथा रोड, कमलाबाद बड़ौली) में बिना एलडीए लेआउट स्वीकृति के सैकड़ों अवैध मकान बन रहे हैं। बिल्डर मयूर जायसवाल और कोमल जायसवाल द्वारा कराए जा रहे इन निर्माणों में जेई हेमंत ने कागजों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण दिखाया, लेकिन जमीन पर न तो कोई सील हुई और न ही तोड़फोड़। कोर्ट में लंबित वाद के बावजूद काम जारी रहा, और भ्रष्ट जेई की फर्जी कार्रवाई से बिल्डरों को खुला संरक्षण मिला।
असिस्टेंट इंजीनियर संजय वशिष्ठ का भी है संरक्षण
सीतापुर रोड पर अन्ना मार्केट में अवैध निर्माण और भगवती विहार गेट के बगल में बनी अवैध बिल्डिंग का मामला सामने आया। बिल्डर गोपाल जायसवाल ने 5 हजार स्क्वायर फीट में व्यावसायिक बिल्डिंग बना ली, जिसमें जेई हेमंत कुमार और असिस्टेंट इंजीनियर (एई) संजय वशिष्ट की लापरवाही साफ दिखी। सील बिल्डिंगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह का है हेमंत पर हाथ
इसके अलावा, अजीज नगर रोड पर मड़ियांव राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के पास भी अवैध बिल्डिंग धड़ल्ले से बन रही है। एलडीए ने दो माह पहले नोटिस जारी किया था, लेकिन उसके बाद काम में तेजी आ गई। प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह और जेई हेमंत की शह पर यह सब हो रहा है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार के निर्देश कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं।
सवाल यह है कि आखिर इस भ्रष्ट अभियंता पर कार्रवाई कब होगी? क्या उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के संरक्षण में ही यह सिलसिला चल रहा है? योगी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति क्या फेल हो गई है?

