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31 Aug 2026, Mon

गणतंत्र दिवस की परेड और कर्तव्य पथ पर गूंजती तालियों के बीच जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया, तो सिर्फ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश और भारत गर्व से भर उठा। यह सम्मान सिर्फ एक पदक नहीं है, बल्कि उस अदम्य साहस और तपस्या की पहचान है, जिसने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नए मुकाम पर खड़ा कर दिया है।

सीएम योगी ने जताया गर्व
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया (X) के जरिए शुभांशु शुक्ला को बधाई देते हुए उन्हें ‘राज्य का गौरव’ बताया। उन्होंने कहा कि शुभांशु के साहस और संयम ने भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को एक नई गति और नई उड़ान दी है। सीएम योगी ने लिखा कि शुभांशु की निडरता और विज्ञान के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगा।

कौन हैं शुभांशु शुक्ला और क्यों है यह मिशन खास?
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला पिछले साल जून में उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने ऐतिहासिक ‘एक्सिओम मिशन-4’ (Axiom-4) के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि शुभांशु शुक्ला, विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं।

हैरानी की बात यह है कि राकेश शर्मा ने 1984 में अंतरिक्ष में कदम रखा था। उसके ठीक 41 साल बाद किसी भारतीय ने इस तरह के मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। शुभांशु ने 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए और भारत का मान बढ़ाया।

पुरस्कारों का लंबा सफर
यह पहली बार नहीं है जब शुभांशु शुक्ला को उनके काम के लिए सराहा गया हो। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें ‘उत्तर प्रदेश गौरव’ सम्मान से भी नवाजा था। इसी साल 24 जनवरी को ‘यूपी दिवस’ के मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें सम्मानित किया था।

शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि हमें बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो ज़मीन से लेकर आसमान तक की कोई भी दूरी बड़ी नहीं होती। आज जब वे अशोक चक्र पहनकर हमारे सामने हैं, तो वे करोड़ों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं कि मेहनत और साहस के दम पर इतिहास कैसे रचा जाता है।

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