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6 Mar 2026, Fri

पत्नी बोली- ‘डेढ़ करोड़ चाहिए…’ प्रेमिका ने कहा पैसे ले लो, पति मुझे दे दो; गजब है भोपाल की कहानी

मध्य प्रदेश के भोपाल की फैमिली कोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया, जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां एक प्रेमिका अपने शादीशुदा प्रेमी के लिए डेढ़ करोड़ की संपत्ति देने पर राजी हो गई.यह पूरा घटनाक्रम 90 के दशक की चर्चित फिल्म ‘जुदाई ‘ की कहानी की याद दिलाता है, फर्क बस इतना है कि यह कहानी परदे की नहीं, हकीकत की है.

भोपाल में एक 42 वर्षीय सरकारी कर्मचारी का दिल अपने ही विभाग में काम करने वाली उससे करीब 10 साल बड़ी महिला अधिकारी पर आ गया. वक्त के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और घर में दूरियां भी. पत्नी और पति के बीच रोजाना के झगड़े होने लगे. इनका असर उनकी 16 और 12 साल की बेटियों पर पड़ने लगा. माहौल इतना बिगड़ा कि बड़ी बेटी ने ही फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट में बोला पति- वह अब गलफ्रेंड के साथ ही रहेगा

न्यायालय में काउंसलिंग का दौर शुरू हुआ. कई बैठकों के बाद पति ने साफ कहा वह अपनी सहकर्मी (प्रेमिका) के साथ रहना चाहता है और तलाक के लिए तैयार है. उसने यह भी माना कि घर का तनाव अब असहनीय हो चुका है, हालांकि वह बेटियों से बेहद प्यार करता है. करीब पांच साल तक चले इस विवाद में अंततः समझौते का रास्ता निकला.

पत्नी ने अपनी और बेटियों की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट शर्त रखी कि उसे एक डुप्लेक्स मकान ओर 27 लाख रुपये नकद चाहिए. चौंकाने वाली बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने यह प्रस्ताव तुरंत स्वीकार कर लिया. मकान ओर नकद मिलकर डेढ़ करोड़ देने को वो राजी हो गई. उसका कहना था कि वह नहीं चाहती कि उसके प्रेमी का परिवार असुरक्षित रहे. अब दोनों पक्ष इस सहमति के साथ अलग हो रहे हैं.

1997 की जुदाई फिल्म की तरह कहानी

1997 में आई फिल्म में भी पति-पत्नी और तीसरे व्यक्ति के बीच पैसों के बदले रिश्तों का सौदा दिखाया गया था. हालांकि वहां कहानी में लालच प्रमुख कारण था, जबकि भोपाल के इस मामले में आपसी सहमति और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा को आधार बनाया गया.

यह शायद राजधानी का पहले ऐसा मामला है. जहां किसी प्रेमिका ने अपने प्रेमी को हासिल करने के लिए इतनी बड़ी रकम चुकाई हो. विशेषज्ञ मानते हैं कि वैवाहिक विवादों में सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है. ऐसे में भावनात्मक तनाव से बेहतर है कि कानूनी और आर्थिक रूप से स्पष्ट समाधान निकाला जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके.

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