पुराने लखनऊ के भदेवा मार्ग पर स्थित ऐशबाग हाइट्स परियोजना के सभी फ्लैट भले ही बिक चुके हों, मगर फ्लैट मालिकों की समस्याएँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो संतोषजनक जवाब मिल रहा है और न ही समस्याओं का समाधान हो रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि खराब निर्माण गुणवत्ता के कारण एक हादसे में एक व्यक्ति की जान भी चली गई। सूत्रों के अनुसार, प्राधिकरण एक ही चहेते ठेकेदार को लगातार बड़ी-बड़ी परियोजनाएँ सौंप रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। फ्लैट मालिकों ने अपर सचिव सी.पी. त्रिपाठी से मुलाकात कर ठेकेदार की लापरवाही की शिकायत की है। जनमत की जाँच में सामने आया कि ठेकेदार को पूरी परियोजना की जिम्मेदारी सौंपकर लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
ऐशबाग हाइट्स में 9 अगस्त 2025 को हुआ हादसा निर्माण गुणवत्ता और प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। अरमान, जो एक फ्लैट में वातानुकूलन स्थापित करने का काम कर रहा था, कमजोर दीवार के कारण हुए हादसे में मृत्यु का शिकार हो गया। इस घटना ने न केवल फ्लैट मालिकों को स्तब्ध कर दिया, बल्कि प्राधिकरण और ठेकेदार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि:
पुलिस को सूचना नहीं दी गई: अपार्टमेंट प्रबंधन ने इस हादसे की जानकारी पुलिस को देने की बजाय मामले को दबाने की कोशिश की।
मृतक के परिवार की उपेक्षा: मृतक अरमान के परिवार को न तो कोई समुचित सहायता दी गई और न ही उनकी शिकायत पर ध्यान दिया गया।
मामले को रफा-दफा करने की साजिश: निवासी कल्याण समिति के अनुसार, इस हादसे को परिसर के अंदर ही दबा दिया गया, जो स्पष्ट रूप से ठेकेदार और प्राधिकरण के अधिकारियों को बचाने का प्रयास था।
यह घटना न केवल निर्माण गुणवत्ता की कमी को दर्शाती है, बल्कि प्राधिकरण और ठेकेदार की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को भी उजागर करती है। फ्लैट मालिकों का कहना है कि ऐसी लापरवाही से भविष्य में और बड़े हादसे हो सकते हैं, जिसके लिए ठेकेदार और प्राधिकरण को तत्काल जवाबदेह ठहराना जरूरी है।
ठेकेदार की लापरवाही से गई एसी मैकेनिक की जान
ऐशबाग हाइट्स में 9 अगस्त 2025 को हुआ हादसा निर्माण गुणवत्ता और प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। अरमान, जो एक फ्लैट में वातानुकूलन स्थापित करने का काम कर रहा था, कमजोर दीवार के कारण हुए हादसे में मृत्यु का शिकार हो गया। इस घटना ने न केवल फ्लैट मालिकों को स्तब्ध कर दिया, बल्कि प्राधिकरण और ठेकेदार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि:
पुलिस को सूचना नहीं दी गई: अपार्टमेंट प्रबंधन ने इस हादसे की जानकारी पुलिस को देने की बजाय मामले को दबाने की कोशिश की।
मृतक के परिवार की उपेक्षा: मृतक अरमान के परिवार को न तो कोई समुचित सहायता दी गई और न ही उनकी शिकायत पर ध्यान दिया गया।
मामले को रफा-दफा करने की साजिश: निवासी कल्याण समिति के अनुसार, इस हादसे को परिसर के अंदर ही दबा दिया गया, जो स्पष्ट रूप से ठेकेदार और प्राधिकरण के अधिकारियों को बचाने का प्रयास था।
यह घटना न केवल निर्माण गुणवत्ता की कमी को दर्शाती है, बल्कि प्राधिकरण और ठेकेदार की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को भी उजागर करती है। फ्लैट मालिकों का कहना है कि ऐसी लापरवाही से भविष्य में और बड़े हादसे हो सकते हैं, जिसके लिए ठेकेदार और प्राधिकरण को तत्काल जवाबदेह ठहराना जरूरी है।

लगातार परियोजनाएँ हासिल: सूत्र बताते हैं कि लंबे समय से प्राधिकरण एक ही ठेकेदार को सभी प्रमुख योजनाओं का लाभ दे रहा है।
नादान महल मार्ग पर बहुमंजिला वाहन स्थल।
चौक में ज्योतिबा फूले उद्यान में वाहन स्थल और विवाह स्थल।
सबसे बड़ा ठेका: बसंत कुंज योजना, जो इसी ठेकेदार को सौंप दी गई।
आंतरिक साठगांठ का आरोप: ठेकेदार को प्राधिकरण में दीमक की तरह फैलाव माना जा रहा है। पूर्व मुख्य अभियंता इंदु शेखर से इसकी अच्छी साठगांठ थी, और वर्तमान अधिकारियों के साथ भी मजबूत रिश्ते बने हुए हैं।
कमीशनखोरी का खेल: परियोजनाओं में जमकर अनियमितताएँ हो रही हैं। निर्माण सामग्री में कमीशनखोरी कर अधिकारियों तक हिस्सा पहुँचाया जाता है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
जनमत की माँग: उपाध्यक्ष तत्काल संज्ञान लें
ऐशबाग हाइट्स जैसी परियोजनाओं में फ्लैट मालिकों का भरोसा टूट रहा है। अरमान की मृत्यु जैसे हादसे और लगातार बढ़ रही शिकायतें इस बात का सबूत हैं कि ठेकेदार की लापरवाही और प्राधिकरण की निष्क्रियता अब बर्दाश्त के बाहर है। जनमत माँग करता है:
ठेकेदार को पूरी परियोजना की कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारी तय की जाए।
अरमान की मृत्यु की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तत्काल इस मामले में संज्ञान लें और सभी शिकायतों का समाधान करें।
निर्माण सामग्री और प्रक्रिया की जाँच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
यदि ऐसी लापरवाही अन्य परियोजनाओं में फैल गई तो क्या होगा? फ्लैट मालिकों और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले, इसके लिए जनमत सभी से अपील करता है। यदि आपके पास भी ऐसी कोई शिकायत है, तो हमें बताएँ – हम आपकी आवाज उठाएँगे!
कल्याण समिति ने की लापरवाही की शिकायत
जालीदार दरवाजों की कमी: फ्लैटों में सुरक्षा के लिए आवश्यक जालीदार दरवाजे नहीं लगाए गए, जिससे मच्छरों और कीटों का खतरा बना हुआ है।
आठवीं मंजिल पर दरवाजे की अनदेखी: दूसरी मंजिल की छत की तरह आठवीं मंजिल पर भी दरवाजा लगाना जरूरी था, पर ठेकेदार ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
रसोई में अपर्याप्त सुविधाएँ: रसोई में केवल एक ही नल (गर्म पानी) लगाया गया है, जबकि मानकों के अनुसार दो नल होने चाहिए। साथ ही, रसोई की स्लैब निर्माण मानकों के विपरीत बनी है, जो उपयोगिता को प्रभावित कर रही है।
सौर पैनल की अनुपस्थिति: प्राधिकरण ने अब तक सौर पैनल स्थापित नहीं किए, जिससे पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का वादा अधूरा है।
बैठक कक्ष में प्रावधानों की कमी: बैठक कक्ष में बिजली और अन्य प्रावधान नियमों के अनुसार नहीं बनाए गए, जिससे फर्नीचर और उपकरण लगाने में परेशानी हो रही है।
विद्युत परिवर्तक पुनर्स्थापना का विवाद: एक विद्युत परिवर्तक को दोबारा स्थापित कराने का निर्णय कितना उचित है? इससे बिजली आपूर्ति में अनियमितता बढ़ रही है।
पानी निकासी व्यवस्था ध्वस्त: छत से पानी की निकासी की व्यवस्था पूरी तरह खराब है, जिससे बरसात में जलभराव और दीवारों पर रिसाव की समस्या आम हो गई है।
कमजोर दीवारों से जानलेवा हादसा: बिल्डिंग की दीवारें इतनी कमजोर हैं कि बीते 9 अगस्त 2025 को एक हादसे में “अरमान” नामक व्यक्ति, जो फ्लैट में वातानुकूलन (एसी) लगाने का काम कर रहा था, अपनी जान गँवा बैठा। यह हादसा निर्माण की खराब गुणवत्ता का जीता-जागता सबूत है।
अन्य गंभीर आरोप: निवासी कल्याण समिति ने निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता, अनियमित रखरखाव और अतिरिक्त खर्चों पर भी सवाल उठाए हैं।

