दोहा, क़तर: 9 सितंबर 2025 को क़तर की राजधानी दोहा में इज़राइली सेना द्वारा किए गए एक हवाई हमले ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। इस हमले का लक्ष्य हमास के वरिष्ठ नेताओं का एक समूह था, जो कथित तौर पर गाज़ा में संघर्ष विराम पर चर्चा के लिए एकत्रित हुआ था। इस हमले में पांच हमास सदस्यों और एक क़तरी सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई, जबकि हमास के मुख्य वार्ताकार खलील अल-हय्या और अन्य वरिष्ठ नेता बच गए।
हमले का विवरण और क़तर का रुख
इज़राइली सेना (IDF) और शिन बेट ने संयुक्त बयान में कहा कि यह “हमास के आतंकवादी संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व” पर एक “सटीक हमला” था, जिन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमले और इज़राइल के खिलाफ युद्ध के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया। इज़राइल ने दावा किया कि उसने नागरिकों को नुकसान कम करने के लिए सटीक हथियारों और अतिरिक्त खुफिया जानकारी का उपयोग किया। क़तर ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “कायरतापूर्ण” और “अंतरराष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन” करार दिया। क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा कि देश इस “लापरवाह इज़राइली व्यवहार” को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसकी उच्चतम स्तर पर जांच की जा रही है।
ट्रम्प की भूमिका और बयान
इज़राइली अधिकारियों ने दावा किया कि इस हमले से पहले अमेरिका को सूचित किया गया था और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे “हरी झंडी” दी थी। इज़राइली चैनल 12 के हवाले से कहा गया कि ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को मंजूरी दी थी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने हमले से पहले ट्रम्प प्रशासन को सूचित किया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि दोहा में हमला “दुर्भाग्यपूर्ण” था और यह इज़राइल या अमेरिका के शांति के लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाता। लेविट ने यह भी कहा कि ट्रम्प ने क़तर को एक महत्वपूर्ण सहयोगी माना और हमास को खत्म करना एक “योग्य लक्ष्य” है। ट्रम्प ने हमले के बाद इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और क़तरी अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने इस हमले के लिए कोई असंतोष व्यक्त किया या नहीं। इससे पहले, ट्रम्प ने हमास को “अंतिम चेतावनी” दी थी कि वह उनके संघर्ष विराम प्रस्ताव को स्वीकार करे, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने दावा किया कि इज़राइल ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन हमास ने इसे “अपमानजनक आत्मसमर्पण दस्तावेज़” करार दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्यापक निंदा को जन्म दिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इसे क़तर की संप्रभुता का उल्लंघन बताया और क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला कदम करार दिया। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी इसकी निंदा की, जिसमें यूएई ने इसे इज़राइल के साथ सामान्यीकरण के प्रयासों पर असर डालने वाला बताया। संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि इस तरह के हमले शांति वार्ताओं को “तबाह” करने वाले हैं, जबकि क़तर ने घोषणा की कि वह अब इज़राइल और हमास के बीच मध्यस्थता के प्रयासों को निलंबित कर रहा है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
यह हमला क़तर की छवि को प्रभावित कर सकता है, जो एक प्रमुख गैर-नाटो अमेरिकी सहयोगी और मध्यस्थ के रूप में जाना जाता है। दोहा में अमेरिकी सैन्य अड्डा अल उदेद की मौजूदगी के बावजूद, इस हमले ने अमेरिका की क्षेत्र में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम इज़राइल के गाज़ा में सैन्य अभियान को और तेज करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसे कई लोग “नरसंहार” के रूप में देखते हैं। क़तर, मिस्र और अमेरिका ने लंबे समय से गाज़ा में संघर्ष विराम के लिए मध्यस्थता की है, लेकिन यह हमला इन प्रयासों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। हमास ने कहा कि यह हमला नेतन्याहू की शांति वार्ताओं में रुचि न होने की मंशा को दर्शाता है।
निष्कर्ष
दोहा में इज़राइली हमला मध्य पूर्व में पहले से ही जटिल स्थिति को और उलझा रहा है। ट्रम्प प्रशासन की इस हमले में कथित भूमिका ने क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच अविश्वास को बढ़ाया है, और क़तर जैसे देश अब अपनी सुरक्षा और मध्यस्थता की भूमिका पर पुनर्विचार कर सकते हैं। इस बीच, गाज़ा में युद्ध और बंधक संकट का समाधान और दूर लग रहा है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नज़र रखे हुए है कि यह हमला क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्रयासों को किस दिशा में ले जाएगा।
