भीड़ का जनसैलाब: सुबह से ही उमड़ी भीड़, ट्रेनों-बसों से पहुंचे कार्यकर्ता
रैली का आयोजन मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल (इको गार्डन) पर किया गया। सुबह के करीब 4:30 बजे से ही नीले झंडों का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेशभर से ट्रेनों, बसों और निजी वाहनों से कार्यकर्ता पहुंचे। पार्टी ने रैली से एक दिन पहले ही 80,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को लखनऊ पहुंचा दिया था। अनुमान है कि कुल 5 लाख से अधिक लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। 26 रैली स्थल और आसपास के इलाकों में नीले रंग की चादर बिछी हुई थी, जहां दीवारें चित्रकला, बैनर और पोस्टरों से सजी नजर आईं।
कार्यकर्ताओं ने ‘बहन जी का संदेश’, ‘बहुजन नायक कांशीराम अमर रहें’ और ‘राशन नहीं, शासन चाहिए’ जैसे नारों से वातावरण गर्म कर दिया। बीएसपी समर्थकों ने गांव-गांव में वॉल पेंटिंग और सोशल मीडिया कैंपेन चलाकर लोगों को जुटाया। यह रैली 2016 के बाद लखनऊ में बीएसपी का पहला बड़ा राज्य स्तरीय कार्यक्रम था।
सपा-बीजेपी पर तीखा प्रहार, PDA को बताया ‘छलावा’
लगभग तीन घंटे तक मंच पर रहने वाली मायावती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार में रहते हुए हमारे संत-महापुरुषों को याद नहीं आते, लेकिन वोट के समय PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का छलावा किया जाता है।” उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए दलितों और पिछड़ों के साथ भेदभाव किया जाता है।
मायावती ने बीजेपी सरकार पर भी हमला बोला, “बहुजन समाज को सशक्त बनाना ही कांशीराम जी का सपना था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में दलितों-ओबीसी और अल्पसंख्यकों को उनका हक नहीं मिल रहा।” उन्होंने 2027 चुनावों में बीएसपी की एकाकी लड़ाई का ऐलान किया और कार्यकर्ताओं से ‘लखनऊ चलो’ अभियान को और मजबूत करने का आह्वान किया।
आकाश आनंद ने मंच पर पहली बार सार्वजनिक रैली में मायावती के साथ जगह साझा की। उन्होंने कहा, “कांशीराम जी के विचारों को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। बीएसपी फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज होगी।” मंच पर मायावती के भाई आनंद कुमार, वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा सहित सात अन्य नेता भी मौजूद थे। यह आकाश की पार्टी में वापसी के बाद पहला बड़ा मौका था, जो उनके नेतृत्व को मजबूत करने का संकेत देता है।
सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था: 2114 पुलिसकर्मी तैनात, कई रूट बंद
रैली के मद्देनजर लखनऊ पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। 2114 पुलिसकर्मी, जिसमें ड्रोन निगरानी और फोर्स तैनाती शामिल थी, मैदान पर तैनात रहे। 16 बंगला बाजार, स्क्वायर, पुरानी जेल रोड सहित कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहा। शहीद पथ पर बसों की कतारें लगी रहीं,
पिछली रैलियों के हादसों को ध्यान में रखते हुए, बीएसपी ने रामाबाई रैली ग्राउंड को कार्यकर्ताओं के ठहराव के लिए बुक किया था, जिसकी लागत करीब 10 लाख रुपये बताई जा रही है।
राजनीतिक संदेश: 2027 की तैयारी, प्रतिद्वंद्वियों में हलचल
यह रैली बीएसपी के लिए महज श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनरागमन का संकेत है। 2022 विधानसभा चुनावों में मात्र एक सीट पर सिमट चुकी पार्टी अब अपनी कोर वोटबैंक- दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक- को मजबूत करने पर जोर दे रही है। भीड़ में युवा कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक थी, जो आकाश आनंद के प्रभाव को दर्शाती है।
प्रतिद्वंद्वी दलों में चिंता की लकीरें दिखीं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने अपनी 9 अक्टूबर की रैली स्थगित कर दी, ताकि बीएसपी से टकराव न हो। सपा और कांग्रेस ने भी रैली को ‘शक्ति प्रदर्शन’ बताते हुए अपनी रणनीति पर विचार करने का संकेत दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मायावती ऐसी गतिविधियों को जारी रखेंगी, तो बीएसपी फिर से तीसरा विकल्प बन सकती है।
LNV इंडिया की टीम ने रैली स्थल से लाइव कवरेज किया, जहां कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था। यह रैली न केवल बीएसपी के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन वोट की ध्रुवीकरण का भी संकेत देती है।

