समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके परिवार के लिए मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। रामपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में एमपी- एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए 7 साल की सजा सुनाई है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर यह नौबत क्यों आई, तो आपको बता दें कि यह मामला दो जन्म प्रमाण पत्रों (Birth Certificates) और उनके आधार पर पासपोर्ट बनवाने से जुड़ा है। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पासपोर्ट बनवाया था। इसी मामले में रामपुर कोर्ट (Rampur Court) में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने सबूतों को देखने के बाद यह माना कि अब्दुल्ला आजम दोषी हैं और उन्हें सात साल की कैद के साथ-साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।
सियासी करियर पर संकट के बादल
अब्दुल्ला आजम के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। आपको याद होगा कि एक पुराने मामले में सजा होने के बाद उनकी विधायकी पहले ही जा चुकी है। अब इस नए मामले में 7 साल की सजा (7 years jail sentence) मिलने के बाद उनकी राजनीतिक वापसी की राह और भी मुश्किल हो गई है। कानून के जानकारों का कहना है कि इतनी लंबी सजा का मतलब है कि वे लंबे समय तक चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रहेंगे।
आजम खान के परिवार पर चौतरफा दबाव
यह सिर्फ अब्दुल्ला की बात नहीं है, बल्कि पूरा परिवार इस वक्त कानूनी पचड़ों में फंसा हुआ है। खुद आजम खान भी कई मामलों में जेल में बंद हैं और पत्नी तजीन फातिमा भी कानूनी लड़ाइयाँ लड़ रही हैं। ऐसे में बेटे को इतनी बड़ी सजा मिलना परिवार के लिए भावनात्मक रूप से भी बहुत भारी पड़ सकता है।
कोर्ट का यह फैसला इस बात का संकेत है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और दस्तावेजों में हेराफेरी किसी को भी भारी पड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या अब्दुल्ला आजम इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल तो रामपुर की राजनीति में सन्नाटा पसर गया है।

