नवरात्रि, नौ दिनों का एक पवित्र उत्सव, माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों को समर्पित है। हर दिन एक नई देवी की आराधना की जाती है, जो हमें शक्ति, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। आज नवरात्रि का पाँचवाँ दिन है और इस दिन हम माँ स्कंदमाता की पूजा करते हैं।
कौन हैं माँ स्कंदमाता?
स्कंदमाता, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, भगवान कार्तिकेय (जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है) की माता हैं। वे प्रेम, मातृत्व और शक्ति का प्रतीक हैं। उनका स्वरूप अत्यंत मनमोहक है: वे चार भुजाओं वाली हैं, अपने दो हाथों में कमल पुष्प धारण करती हैं, और एक हाथ से अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए हुए हैं। उनका चौथा हाथ भक्तों को आशीर्वाद देता हुआ अभय मुद्रा में रहता है। वे अक्सर कमल के आसन पर विराजमान दिखाई देती हैं, यही कारण है कि उन्हें ‘पद्मासना’ भी कहा जाता है। उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
स्कंदमाता की पूजा का महत्व
माना जाता है कि माँ स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। जो लोग निःसंतान हैं या जिन्हें संतान संबंधी कोई समस्या है, वे विशेष रूप से इस दिन माँ की आराधना करते हैं। इसके अलावा, माँ स्कंदमाता ज्ञान और मोक्ष की देवी भी हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति को अज्ञानता से मुक्ति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। वे भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
कैसे करें माँ स्कंदमाता की पूजा?
आराधना मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ: हे देवी, जो सभी प्राणियों में माँ स्कंदमाता के रूप में स्थित हैं, मैं उन्हें बार-बार नमस्कार करता हूँ।
इस मंत्र का जाप करते हुए आप माँ से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना कर सकते हैं। पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें।
इस दिन का विशेष महत्व
नवरात्रि के पाँचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से न केवल मातृत्व सुख मिलता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और सभी बाधाएँ दूर होती हैं। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि शक्ति और ममता का संगम ही जीवन को पूर्ण बनाता है।

