प्रतापगढ़ के कुंडा के परानूपुर स्थित श्रृंगवेरपुर धाम में चल रही नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के छठवें दिन गुरुवार को कथावाचक पूज्य राजन जी महाराज ने भक्त निषादराज की भक्ति, कैकेयी कोपभवन और भगवान श्रीराम के वनगमन जैसे प्रसंगों का दिव्य और मार्मिक वर्णन किया। कथा स्थल भक्ति भाव से सराबोर हो उठा और भजनों की स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालु झूम उठे।
भगवान सुख-दुख से परे हैं
राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान सुख-दुख से परे हैं। उन्होंने बताया कि श्रृंगवेरपुर में जब निषादराज ने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को विश्राम करते देखा, तो वे व्यथित होकर रो पड़े।लक्ष्मण जी ने पूछा, “आप क्यों रो रहे हैं?”निषादराज ने उत्तर दिया, “माता कैकेयी ने यह अच्छा नहीं किया।”लक्ष्मण जी ने समझाया कि प्रभु सुख-दुख से ऊपर हैं, वे परम ब्रह्म हैं।
इस पर महाराज ने भजन गाया, राम बिना सब सूना लागे, नाम बिना सब फूटा भागे। श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर भजन में स्वर मिलाया और वातावरण भक्ति से भर गया।
कथा के छठवें दिन पूज्य राजन जी महाराज के आध्यात्मिक गुरुदेव प्रेमभूषण महाराज भी आए। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा, ईश्वर सर्वव्यापी हैं, और सच्चे मन, श्रद्धा तथा निष्काम भक्ति से ही उनकी प्राप्ति संभव है। उन्होंने भजन “राम ब्रह्म परमार्थ रोक अभीगत अगल अलग” और “मनवा छोड़ दे मोह माया के बंधन, राम नाम ही सच्चा साधन” गाकर श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो दिया।
आयोजक आनंद पांडेय के संयोजन में चल रही यह श्रीराम कथा धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से प्रेरणादायक बन गई है।प्रतिदिन श्रद्धालुओं का जनसागर उमड़ रहा है और हर प्रसंग भक्ति, त्याग और मर्यादा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
आगामी दिनों में भगवान श्रीराम के वनवास काल के अगले प्रसंग का वर्णन होगा, जिसका श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कथा स्थल का हर शब्द और हर भजन भक्ति और आध्यात्मिकता का संदेश दे रहा है। राम कथा का रस अमृत समान, सुनो तो मिटे हर जीवन का क्लेश महान।

