अतिक्रमण हटाने के लिए रविवार सुबह सात बजे पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था। नगर निगम जोन एक की टीम भी संसाधनों के साथ थी। सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री की ओर से जनपद न्यायाधीश को भी पत्र लिखा गया था, जिसके बाद रविवार को कार्रवाई हुई।
कुछ चैंबर अब भी मौजूद: डीएम ऑफिस के पीछे वाली सड़क पर ल चार चैंबर तोड़े गए, लेकिन 15 अब भी बने हैं। इनमें से एक पार्षद का बताया जा रहा है, जिस पर बुलडोजर नहीं चला। स्वास्थ्य भवन तिराहे से डीएम ऑफिस वाली सड़क पर आधा किमी के फुटपाथ पर अधिवक्ताओं के चैंबर हैं। यह फुटपाथ स्मार्ट सिटी योजना में कई करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया था। फुटपाथ खाली नहीं है और सड़क पर गाड़ियां खड़ी होती हैं, जिससे दिनभर जाम सी स्थिति रहती है। पूर्व मंडलायुक्त ने कई बार इन कब्जों को लेकर सवाल उठाया, पर अधिवक्ताओं का मामला होने से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अपर पुलिस उपायुक्त पश्चिमी धनंजय कुशवाहा का कहना है कि कब्जे नगर निगम ने हटाए। पुलिस सहयोग में रही। नगर निगम के जोनल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि अभियान पुलिस का था। इसमें नगर निगम की टीम संसाधनों के साथ रही।

