पड़ोसी देश पाकिस्तान में रक्षा तंत्र और राजनीतिक समीकरणों में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट ने हाल ही में ‘डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट’ और ‘नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट’ में संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इस नए घटनाक्रम के तहत देश की तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—को पूरी तरह से एक केंद्रीयकृत कमांड ढांचे के अधीन ला दिया गया है। फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में असीम मुनीर अब इस पूरी सैन्य ताकत के केंद्र बिंदु बन चुके हैं। इस बड़े बदलाव को कोई मुनीर का मास्टर प्लान बता रहा है तो कोई इसे वहां की अंदरूनी व्यवस्था की बड़ी मजबूरी मान रहा है। इस पूरी रिपोर्ट में जानिए कि इस बदलाव के क्या मायने हैं और इसके जवाब में भारत की ओर से क्या रणनीतिक तैयारियां की जा रही हैं।
पाकिस्तान में बदला सैन्य ढांचा: असीम मुनीर बने सर्वसर्वा
पाकिस्तान के इतिहास में यह पहला मौका है जब सैन्य शक्तियों का इस हद तक केंद्रीयकरण किया गया है। नए कानूनों के लागू होने के बाद फील्ड मार्शल असीम मुनीर के हाथ में केवल थल सेना की कमान ही नहीं, बल्कि नौसेना और वायु सेना की ऑपरेशनल कमान भी आ गई है। जानकारों के मुताबिक, यह कदम साल 2025 में लाए गए उन संवैधानिक बदलावों की अगली कड़ी है जिनके तहत ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) का पद सृजित किया गया था और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन के पद को समाप्त कर दिया गया था।
इस नए ढांचे के जरिए रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) के अंतर्गत एक नया डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर बनाया गया है। यह नया ऑफिस जमीन, आसमान, समुद्र के साथ-साथ साइबर और स्ट्रैटेजिक डोमेन में भी तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का काम करेगा। कानून के मुताबिक मुनीर अब प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार की भूमिका में भी हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान की प्रशासनिक और सैन्य ताकत अब मूल रूप से एक ही व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।
परमाणु हथियारों की कमान और असीम मुनीर की बढ़ती ताकत
इस नए और केंद्रीकृत सैन्य ढांचे का सबसे संवेदनशील पहलू देश के रणनीतिक और परमाणु हथियारों की कमान से जुड़ा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों के बाद पाकिस्तान के परमाणु और सामरिक हथियारों के नियंत्रण का दायरा भी पूरी तरह से सेना प्रमुख के प्रभाव क्षेत्र में और अधिक मजबूती से आ गया है। पारंपरिक सैन्य कमांड की जगह अब एक एकीकृत स्ट्रैटेजिक सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस तरह की अत्यधिक केंद्रीकृत व्यवस्था से भले ही क्राइसिस के समय त्वरित फैसले लेने में आसानी हो, लेकिन यह अंदरूनी संस्थागत संतुलन के लिए एक बड़ा जोखिम भी बन सकती है। जब सारे फैसले और नियंत्रण सिर्फ एक ही सैन्य पद और व्यक्ति के अधीन आ जाते हैं, तो आंतरिक बहसों और लोकतांत्रिक नियंत्रण की गुंजाइश काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे एक सोचे-समझे मास्टर प्लान के साथ-साथ वहां के सैन्य तंत्र की एक बड़ी मजबूरी के रूप में भी देखा जा रहा है ताकि देश के भीतर अपनी पकड़ को और अधिक अमिट बनाया जा सके।
भारत का ‘काउंटर प्लान’: नई दिल्ली की पैनी नजर और रणनीतिक तैयारियां
पाकिस्तान के इस नए मिलिट्री कमांड स्ट्रक्चर और घटनाक्रम पर नई दिल्ली में बैठे सुरक्षा विशेषज्ञ बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। भारतीय रक्षा जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम केवल कागजी या कानूनी रीब्रांडिंग नहीं है, बल्कि यह भविष्य के संघर्षों में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स को साधने की एक सोची-समझी कोशिश है।
इसके जवाब में भारत भी अपनी थल, जल और वायु सेना के बीच समन्वय को और अधिक धारदार बनाने के लिए ‘थिएटर कमांड’ (Theater Commands) के अपने आधुनिक मॉडल पर तेजी से काम कर रहा है। भारतीय सामरिक नीति के तहत पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर किसी भी संयुक्त खतरे से निपटने के लिए तकनीक आधारित सर्विलांस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है। भारत का स्पष्ट संदेश है कि पड़ोसी देश की किसी भी सामरिक दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए देश का काउंटर प्लान पूरी तरह से तैयार और मुस्तैद है।

